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सोनू राजपूतonline

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सोनू के दोहे

(251) उत्तम कुल क्या जनमिये,जो उत्तम न होय। सोबन के कलश में बिस की,पृशंसा करे न कोय।। (252) शरीर तो अपना नश्वर है,पर आत्मा अमर। सोनू शरीर...

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सोनू के दोहे

( 201) अंधे प्रेमी होत हैं, अंधा उनका प्यार। अपने प्रेम के सिबा,कछु दिखत न यार।। (202) झूंठा की एक दो बार ही, बातें माने सब...

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ये तो बिधि का बिधान है,

(151) ये तो बिधि का बिधान है, इसे न बदिला जाय। जो जैसे काम करे,सो तेसा फल पाय।। (152) भाग तो तेरे हाथ नहीं,करम...

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दुख ही भला,सदां न किसी को होय

(101)सोनू जे दुख ही भला,सदां न किसी को होय। जब आये सो जान पड़े,मीत कुमीत है कोय।।(102) शरीर पाया तो क्या हुआ,गर्ब करो न...

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उत्तम गुण जो समाप्त भये, बिपत्ती से बचै न अंग

(51) उत्तम गुण जो समाप्त भये, बिपत्ती से बचै न अंग । जब रंग छूटे कंचन का, लोहे को खाये जंग ।। (52) जो...

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