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Riddhi Vishaloffline

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  • जीवनसाथी❤

    जीवनसाथी!
    साथ आपका,
    शाश्वत सत्य-सा
    हो गया जीवन में,
    जैसे सदियों से हो!
    दिन भर के सफर में
    सुबह की अंगड़ाई
    दोपहर की चुप्पी
    शाम की हलचल है
    आपका होना।
    किसी मन्दिर के
    गर्भगृह-सी शांति है,
    अपने से, अपने ही
    अपनत्व-सा निर्मल है,…

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  • सदा को मेरे होना तुम! (प्रेम-कविता)

    जो मैं बिखरुं,धागा बनकर
    खुद में मुझे पिरोना तुम,
    पिघलूं नदियां सी जो,सागर बन
    खुद में मुझे डुबोना तुम,
    ऐ चांद मेरे!हर रात मुझे
    यों रोशनी में भिगोना तुम,
    और नहीं कुछ मांगती,
    सदा को मेरे होना तुम।

    आज को कल के ख्वाब हसीन
    संग में मेरे संजोना…

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  • एक रानी थी, वर्षा, जो रहती बादल के

    रूठी रानी

    एक रानी थी, वर्षा,
    जो रहती बादल के
    महल में थी;
    शीतल-निर्मल,
    कल-कल छल-छल
    करती,आती थल पर वो,
    और कभी मिल जाती
    जल मे, सागर
    और सरोवर के,
    पेड़ बुलाते जब भी उसको,
    दौड़ी-दौड़ी आती थी,
    अपने प्रियतम की
    पुकार को,
    अनसुनी ना कर पाती थी;
    देखा एक दिन रानी ने,
    प्रियतम पर…

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  • एक रानी थी, वर्षा, जो रहती बादल के

    एक रानी थी, वर्षा,
    जो रहती बादल केरूठी रानी

    एक रानी थी, वर्षा,
    जो रहती बादल के
    महल में थी;
    शीतल-निर्मल,
    कल-कल छल-छल
    करती,आती थल पर वो,
    और कभी मिल जाती
    जल मे, सागर
    और सरोवर के,
    पेड़ बुलाते जब भी उसको,
    दौड़ी-दौड़ी आती थी,
    अपने प्रियतम की
    पुकार को,
    अनसुनी ना कर पाती…

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  • जनम-जनम का साथ

    जनम-जनम का साथ है तुम्हारा हमारा……तुम्हारा हमाराऽऽऽऽ…….बहुत बहुत शुक्रिया दोस्तों!”ताहिर ने ज्यों ही गाना पूरा किया,उसका ध्यान ऑडियन्स में बैठी अपनी पत्नी नज़्म पर गया,जो एक टक उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।गाना ख़त्म हो चुका था,नज़्म ताहिर को देखे…

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  • कर्मों के काग़ज़ जांच लूँ

    कर्मों के काग़ज़ जांच लूँ
    कहीं तो ये हिसाब मिले,
    वो किस जन्म का पुण्य था
    कि इतने हसीन जनाब मिले!❤

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  • सरहद पर साजन को पत्र

    प्रियतम! प्राणप्यारे मेरे!
    पत्र तुम्हारा पाया मैंने;
    करूण स्वप्न में डूबते,
    नैनों को समझाया मैंने।

    भान तुम्हारी मनःदशा का,
    हुआ मुझे, ऐ हृदय सखा!
    ना कहो भले मैं भांप गई,
    दीपक तले जो छुपाए रखा।

    माँ की,बहना की,लाडो की,
    बाबा की चिंता करते हो;
    दुर्बल-दृग-दृश्य छुपाने को,
    पलट कर चल…

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  • मयूरी, ये झरना,ये महल

    “ये झरना,ये महल और यहां नीचे जल में अपनी परछाई देख मुस्कुराते फूल।इन उड़ते पंछियों को तो देखो,मानो जता रहे हो कि हवा कितनी स्वच्छ और निर्मल है।वाह मयूरी!ये क्या बना दिया तुमने।असंख्य भावों से भरे तुम्तहारे नेत्रों सा…

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  • भिक्षुक जीवन

    हाथ वो इक घावों से भरा
    मांगा करता सुख का कतरा,
    सड़कों,गलियारों में फिरता
    बेचारा-सा बिखरा-बिखरा ।

    शमशान-सा सूना चेहरा
    उदासीनता का पेहरा,
    भावशून्य,बस आंखें दो
    ज्यों झील का हो पानी ठहरा।

    ना आस कभी उनमें दिखती
    हर बात छिपी उनमें रहती,
    ना कुछ कहता ना सुनता कुछ
    मुस्काता कि…

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