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Shiv Mishraoffline

  • India, Lakhimpur kheri
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  • ganesh-jadhav

    @ganesh-jadhav

  • Shiv changed their profile picture 1 day, 11 hours ago

  • कभी भी किसी को सताया नहीं हैं।
    किसी को कभी आजमाया नहीं है।
    रहे ख्वाहिशों का सदा कत्ल करते-
    मगर दिल किसी का दुखाया नही है।
    शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’

  • Shiv wrote a new post 1 day, 11 hours ago

    साये यादों के सताते हैं मुझे

    -:मुक्तक:-
    साये यादों के सताते हैं मुझे।
    अब सारी रात जगातें हैं मुझे।
    मेरी किस्मत में ही नहीं मंजिल-
    रास्ते.. अहसास कराते हैं मुझे।

    =================
    स्वयं दिल के ही हांथो हम हुए मजबूर बैठे हैं।
    तुम्हारे इश्क में हम भी, हुए मशहूर बैठे हैं।
    कोरोना से कहीं…

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  • Preeti-Tiwari

    @preeti-tiwari

    liked this
  • 🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂

  • Shiv changed their profile picture 3 days, 7 hours ago

  • Suraj-Awasthi

    @suraj-awasthi

  • Shiv wrote a new post 5 days, 1 hour ago

    हाइकू

    हाइकू”

    देखे सपने
    जरुरत में वैसे
    मेरे अपने।01

    मुसीबतें ही
    सिखाती हैं हमको
    ढंग जीने का ।02

    साथ उनका
    चहिए था जिनका
    मिला ही नहीं।03

    जंग अक्सर
    लडी़ उनके लिए
    थे जो पराये।04

    दिल हमारा
    रहते थे इसमें
    तोडा़ उन्होंने।05

    कसम मेरी
    तोड़ने की खातिर
    खाते अक्सर।06

    हाथ रखते
    अक्सर घाव पर
    जिन्होंने दिए।07

    हमसफर
    छोड़ता बीच में ही
    साथ अक्सर। 08

    हाइकूकार:-
    शिवेन्द्र मिश्र…

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  • Shiv wrote a new post 6 days, 7 hours ago

    कुंडलिया छंद

    कुंडलिया

    रुद्राणी गौरी सती, दुर्गा शक्ति अनूप।
    पार्वती जगदम्बिका, तेरे कई स्वरूप।
    तेरे कई स्वरुप, जगत का मंगल करती।
    होकर मातु दयाल, भक्त की झोली भरती।
    कहता शिव दिव्यांग, तरे…

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  • Adesh Kumar

    @aa4420374gmail-com

  • Shiv wrote a new post 1 week ago

    दोहे

    वरद हस्त रख शीश पर, निर्मल करो शरीर।
    सिद्धिदात्रि मां करि कृपा, हरो सकल जन पीर।1

    होती कन्या भ्रूण की, जब हत्याएं रोज़।
    तब कैसे नवरात्र में, होगा कन्या भोज।।2

    जलता रावण सोचता यह कैसा अन्याय।
    जो कर्मो से निम्न अति, मुझको रहे जलाय।३

    अंतर्मन…

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  • Shiv wrote a new post 1 week ago

    कोरोना कुंडलिया

    01
    आई मुश्किल की घडी़, सुन लो करुण पुकार।
    विपदाएं जग की हरो, जग के पालनहार।
    जग के पालनहार, कहर कोरोना ढाए।
    विचलित हृदय अपार, रोग जो बढ़ता जाए ।
    कहता ‘शिव’ दिव्यांग, करो भगवन भरपाई।
    त्राहि माम हे नाथ, बड़ी विपदा है आई।।

    02
    आया देखो…

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