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फल पकाने में खेल-वीरेंद्र देवांगना

फल पकाने में खेल::
कच्चे फलों-आम, केला, पपीता, चीकू को पकाने के लिए अवैध रूप से कार्बाइड, खरपतवार नाशक और एथिलीन राइपनर का उपयोग किया जाता है। ये मानव शरीर के लिए खतरनाक होने के कारण प्रतिबंधित हैं। करीब 300 रुपए में मिलनेवाले इन धातक रसायनों के पैकेट में 10 पुड़िया रहती है। इसकी दो पुड़िया या पावडर एक कैरेट केला या अन्य फलों के बीच में दबाकर रखने से दो से तीन दिनों के भीतर सारे कच्चे फल पक जाते हैं।
कार्बाइड को पानी में मिलाते हैं, तो उसमें से उष्मा निकलती है और एसिटिलीन गैस का निर्माण करती है। यह उष्णता स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उत्पन्न करती है। इन घातक रसायनों के प्रयोग से फलों की बाहरी स्थिति तो अच्छी हो जाती है, लेकिन इसका मूल स्वाद व महक रफ्फू चक्कर हो जाता है। वहीं इन रसायनों से निकलनेवाली गैसों से कैंसर समेत किडनी, लीवर, फेफड़े और तंत्रिकातंत्र संबंधी विकार शरीर में उत्पन्न होने लगता है।
पहचानः केले को प्राकृतिक तरीके से पकाया जाता है, तो उसका डंठल काला रहता है और केले का रंग गर्द पीला। साथ ही, केले पर थोड़े-थोड़े काले धब्बे दिखते हैं, जिसे चिककबरी कहते हैं, जो उसकी नैसर्गिकता का बोधक है।
इसके उलट यदि केले को कार्बाइड से पकाया जाता है, तो उसका डंठल हरा होता है और केले का रंग नींबुई पीला यानी लेमन येलो हो जाता है। यही नहीं, रसायन से पकाए गए केले का रंग एकदम साफ पीला होता है। उसमें कोई दाग-धब्बा नहीं दिखता।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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