तेलों के बारे में जानकारी :: स्वदेशी मिशन – राजिव दीक्षित जी

तेलों के बारे में जानकारी :: स्वदेशी मिशन – राजिव दीक्षित जी

Rajiv dixitतेलों के बारे में जानकारी
कौन सा खायें और कौन सा नहीं खाना चाहिए

आजकल ये आमतौर पर देखा जाता है कि जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहते हैं कि तेल रिफाइण्ड या डबल रिफाइण्ड खायें
नहीं तो आपको हार्ट अटैक की समस्या या उच्च रक्तचाप या ट्राईग्लिसाराईड आदि की समस्या हो जायेगी

कोई भी डाक्टर ये नहीं कहता है कि तेल सरसों या तिल या मूँगफली या नारियल का खायें या तिल का खायें

(ये बात आप समझ गये होगे कि वो ये क्यों कहते हैं)

अब सच्चाई क्या है
सभी रिसर्चर तथा वागभट जी तथा आर्युवेद ये ही कहते हैं कि
तेल में जितनी अधिक बास और चिपचिपाहट होगी तेल उतना ही अधिक शुद्ध होगा

अर्थात तेल में जो बास और चिपचिपाहट होती है उसमे उतना ही HDL अधिक होगा ये चिपचिपाहट ही hdl होता है
और ये hdl ही है जो तेलों से आता है जो लिवर में बनता है
यदि आप शुद्ध तेल प्रयोग करते हैं तो

ये hdl ही है जो आपके शरीर में वात के रोगों से दूर रखता है तथा hdl को नियंत्रित रखता है और ये hdl आपको हार्ट अटैक से दूर रखता है
राजीव भाई जी ने छत्तीसगढ़ में कुछ लोगों पर ये परिछण किया था

जिनको कोलेस्ट्रोल, ट्राईग्लिसाराईड तथा उच्च रक्तचाप की समस्या अधिक थी
राजीव भाई जी ने उन्हें शुद्ध तेल खाने की सलाह दी
क्योंकि छत्तीसगढ़ में गाव गांव में अभी भी शुद्ध तेल घाणी से निकाला जाता है

और उनको रिफाइण्ड तथा डबल रिफाइण्ड तेल बंद करा दिया
कुछ समय बाद अदभुत परिणाम मिले
डा को दोनों रिपोर्ट दिखाई पहले और बाद वाली
डा ने इसे चमत्कार बताया
उनके तीनों लेवल नियन्त्रण में आ गए

जो मित्र गांव के रहने वाले हैं वो अच्छी तरह से जानते होगे कि
हमारे भारत में वर्ष में 100 से ज्यादा त्योहार आता है
और हर त्योहार में सभी पकवान शुद्ध तेल और शुद्ध घी प्रयोग होता था गावों में अभी भी होता है
और आज से 50-60 वर्ष पहले हमारे किसी भी पूर्वजों को कभी कोई बीमारी नहीं हुई इस तरह की

कभी सुना भी नहीं था
और वे खुब घी तेल खाते थे
और आज तो 17-18 वर्ष के बच्चों को हार्ट अटैक आ जाता है एेसे हजारों की संख्या में युवा व बच्चे भी हैं

वागभट जी और आर्युवेद ये कहता है कि यदि सरसों के तेल में मुह लगाकर देखे और आखों से आंसू आ जाये तो वह शुद्ध तेल होता है

इसलिए रिफाइण्ड, डबल रिफाइण्ड तेल छोडे और शुद्ध तेल (चाहे सरसों या तिल या मूँगफली या नारियल ) या शुद्ध घी खायें

जीवन भर वात के रोगों से बचे रहेंगे और भारत में 60-70 प्रतिशत रोग वात के ही होते हैं

नोटः जिन लोगों को हार्ट ब्लोकेज, उच्च रक्तचाप तथा ट्राईग्लिसाराईड की समस्या है वो पहले किसी वैध से परामर्श के बाद ही ये सब करें

और जो स्वस्थ है वो प्रयोग कर सकते हैं

अमर बलिदानी
श्री राजीव दीक्षित जी
के व्याख्यानों से

राजवीर नितेश

मोतिहारी, ईस्ट चंपारण (बिहार)

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

Visit My Website
View All Articles

I agree to Privacy Policy of Sahity Live & Request to add my profile on Sahity Live.

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account