जातिवाद से अघोषित आपातकाल की ओर – जीतपाल सिंह यादव

जातिवाद से अघोषित आपातकाल की ओर – जीतपाल सिंह यादव

भारत की पावन भूमि पर जहाँ आज सभी जीव स्वतंत्रता की सांस ले सकते हैं, वहीं एक पीड़ा भारतीय लोगों का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही है, और वो पीड़ा है “जातिवाद”। हम जानते हैं कि वेदों में वर्ण व्यवस्था का कोई महत्व नहीं दिया गया। लेकिन फिर भी कुछ सामाजिक अभिकल्पना से
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शिव आराधना – अशोक सिंह

हे शिव शम्भू हे महाकाल हे विश्व विजय हे निर्विकार हे असुरों के संघारक प्रभु हे असुरों के भी मीत यार ।। हैं नाम तुम्हारे अलग-अलग हैं अलग कृपा की भी बयार बस एक कृपा कर दो सब पर जीवन हो जाए निर्विकार ।। तुम ब्रह्मा हो तुम हो विष्णु तुम समय चक्र के दाता
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* पश्चात का महत्व * – हेमा पांडेय

महाभारत का युद्ध चल रहा था – * एक दिन दुर्योधन का * व्यंग्य * से * आहत * होकर * “भीष्म पितामह” * घोषित करते हैं कि – “मैं कल पंडवों का वध कर दूँगा” * उनकी * घोषणा * का पता चलते ही * पंडवों का शिविर * में बेचैनी बढ़ गई –
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आध्यात्म और मनुष्य जीवन – राजेश कुमार

देवियों और सज्जनों आप समस्त महानुभावों को मेरा हाथ जोड़कर सम्मानभरा प्रणाम………..! मेरे कुछ आधात्मिक विचारधारा रखने वाले साथियों ने मुझसे आग्रह किया कि राजेश जी आध्यात्म के ऊपर कोई लेख लिखिये। इसी क्रम में आज की व्यस्त भौतिकवादी जीवन शैली के ऊपर लिख रहा हूँ, जो आध्यात्म से भी सम्बंधित है। दोस्तों, जीवन का
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खुदा का पैग़ाम :: पवित्र कुरान शरीफ – प्रदीप दास

अल्लाह साकार व सशरीर है ,उसका नाम कबीर है!! प्रमाण पवित्र कुरान शरीफ ! सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 52,58,59 आयत 52= फला तुतिअल् – काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा(कबीरन्)।52। अनुवाद:- हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य
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परमात्म रहस्य :: पवित्र गीता जी – प्रदीप दाश

कविः नाम जो बेदन में गावा, कबीरन् कुरान कह समझावा। वाही नाम है सबन का सारा, आदि नाम वाही कबीर हमारा।। सामवेद उतार्चिक अध्याय 3 खण्ड न. 5 श्लोक न. 8 मनीषिभिः पवते पूव्र्यः कविर्नृभिर्यतः परि कोशां असिष्यदत्। त्रितस्य नाम जनयन्मधु क्षरन्निन्द्रस्य वायुं सख्याय वर्धयन् ।।साम 3.5.8।। सन्धिछेदः-मनीषिभिः पवते पूव्र्यः कविर् नृभिः यतः परि कोशान्
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जीवन के अगूण रहस्य – अजय दास & सौम्य दास

एक बार एक मेढक होता है , (असल मे मेढक को जिस परिस्तिथी में रखा जाए तो वो उसी के अनुरूप अपना व्यवहार बदल लेता है अथार्त सर्दी में उसके अनुरूप ओर गर्मियों में उसी के अनुरूप स्वयं को परिवर्तित कर लेता है) जो कि अपने ऊपर बहुत विस्वास करता है उसको लगता है कि
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शास्त्र विधि विरुद्ध साधना पतन का कारण – पवित्र गीता जी

पवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 23, 24 में कहा है कि जो व्यक्ति अन्य देवताओं को पूजते हैं वे भी मेरी (काल जाल में रहने वाली) पूजा ही कर रहे हैं। परंतु उनकी यह पूजा अविधिपूर्वक है(अर्थात् शास्त्रविरूद्ध है भावार्थ है कि अन्य देवताओं को नहीं पूजना चाहिए)। क्योंकि सम्पूर्ण यज्ञों का भोक्ता व
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ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्णब्रह्म का साधक पूर्णब्रह्म को ही प्राप्त होता है:- पवित्र गीता जी

ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्णब्रह्म का साधक पूर्णब्रह्म को ही प्राप्त होता है गीता अध्याय 8 श्लोक 5 से 10 व 13 तथा गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में निर्णायक ज्ञान है। गीता अध्याय 8 श्लोक 13 में कहा है कि मुझ ब्रह्म की साधना का तो केवल एक ओ३म् (ॐ) अक्षर है
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जीवन चक्र – राजेश कुमार

मेरे अजीज दोस्तों, यह जीवन की नैय्या बड़ी अजीव है। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों की प्रकिया से गुजरने के पश्चात मिलता है। आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना मूल्यवान है। कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जो जीवन पर्यन्त हमेशा सुखी और अजय रह सके। प्रत्येक मनुष्य के जीवन
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