Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

Category: शिव शंकर

कविताएँ
Vishwambhar Vyagra

वंदन Poem by विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

हे सत्य सनातनहे अनंतहे शिव भोलेहे जगत-कंत हे शक्ति नियंतासंघारकहे डमरू,त्रिशूलके धारक हे महादेवहे शिवा पतितव ध्यान मग्नसब योगी-यती ले अतुल भक्तिविश्वास धारमैं रहा आजतुझको

Read More »