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भक्ति गीत, नवरात्रि पर।-राणा प्रताप

अब की साल नवरात्रि के व्रतिया न हो।
हमहु करब ये माइ।
हाथ जोड करिला विनितीया न हो।
दुर्गा माई हो जाई सहाय।
तोहरो पंडाल हम सजाईब हो।
वह में क्लशा रखाईब।
क्लशा में दिया हम जलाईब हो
माई से नेहिया लगाईब।
नरियर और चुनरी चढाईब हो
हलुआ पुडी के भोग लगाईब।
सुबह शाम करिला भजनिया न हो।
दुर्गा माई हो जाय सहाय।
नव कन्या के चुनरी ओढाईब हो।
हलुआ पुडी खिलाईब।
नव कन्या के करिला पुजनिया नहो
माई हम पर कृपा बनाई न हो।
हर साल करब हम व्रतिया न हो
तोहार जगराता कराईब।
तोहरे शरण में शीश झुकाईब हो ।
दुर्गा माई हो जाय सहाय।
लेखक -राणा प्रताप
आजमगढ उत्तर प्रदेश
मो 0न0-7347379048

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