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दीपावली पर्व-14 नवम्बर, 2020-मुनीश-महेंद्र

दीपावली पूजा : 14 नवम्बर, 2020
दीपावली पूजा मुहूर्त : 05:28 P.M. से 07:24 P.M.
अमावस्या प्रारम्भ – 14 नवम्बर, 02:17 P.M.; अमावस्या समाप्त – 15 नवम्बर, 10:36 A.M.
प्रदोष काल मुहूर्त : 05:28 P.M. से 08:07 P.M.
महानिशीथ काल मुहूर्त : 11:59 P.M. से 12:32 A.M.

हम सभी जानते हैं कि प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी की स्मृति पर दीपावली पर्व मनाया जाता है दीपावली पर हज़ारो दीये प्रज्जवलित करने की परम्परा रही है इसलिए अमावस्या की काली रात को हज़ारो दीये प्रज्जवलित होने से अंधेरा समाप्त हो जाता है और सम्पूर्ण लोक प्रकाशमय हो जाता है अर्थात ज्ञान का प्रकाश सर्वत्र फैल जाता है, इसलिये दीपावली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दीपों का त्योहार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। 14 नवंबर को 1.16 pm तक चतुर्दशी और फिर अमावस्या प्रारंभ हो जाएगी। इसी कारण 14 नवंबर को ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। शाम 5.28 pm से लेकर रात्रि 08.07 pm का मुहूर्त सबसे ऊत्तम है इस शुभ मुहूर्त में मांलक्ष्मी और श्रीगणेश पूजा की जा सकती है मान्यता है कि दीपावली पर मांलक्ष्मी और श्रीगणेश पूजन से शांति, उन्नति और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। मांलक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के पश्चात प्रदोष काल में मांलक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपावली पर मांलक्ष्मी की ही नहीं अपितु भगवान विष्णु, यमराज, चित्रगुप्त, देवों के राजा इंद्र, कुबेर, भैरव, हनुमानजी, कुल देवता व अपने पितरों की भी श्रद्धा पूर्वक पूजा करनी चाहिए। दीपावली की रात्रि, तंत्र-साधना, सिद्धि, कामना-पूर्ति के पूजा-अनुष्ठान के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। दीपावली की रात्रि में किए गए कार्य शुभ और स्थायी रहते हैं।

महानिशिता काल तांत्रिक और पण्डितों के लिए अधिक उपयुक्त होता है। सामान्यतः मनुष्यों के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही सबसे ऊत्तम है वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है और दीपावली के दिन यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ होता है। दीपावली के दिन प्रातः उठकर अपने परिवार के पूर्वजों व कुल के देवी-देवताओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। दीपावली के दिन मांलक्ष्मी के साधक पूरे दिन का उपवास रखते हैं तथा सांयकाल को लक्ष्मी पूजा के उपरांत ही सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। मांलक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करती हैं और धन, संपदा, वैभव, ऐश्वर्य से उनके जीवन को भर देती हैं। ‘लक्ष्मी’का तात्पर्य केवल धन से ही नहीं अपितु जीवन की सभी परिस्थितियों में सौम्यता/अनुकूलता ही ‘लक्ष्मी(धन,सम्पदा)’कही जाती हैं। श्रीलक्ष्मी का अर्थ – धन, स्वास्थ्य, पराक्रम, सुख, संतान, आनंद, दीर्घायु, भार्या, सम्मान, वाहन, सौभाग्य, इत्यादि से होता है।

प्रत्येक व्यक्ति दीपावली पर, मांलक्ष्मी और श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए पूजा से पूर्व करने योग्य —–
– नई झाडू खरीदे, नई झाडू की पूजा कर आप सफाई नई झाडू से करें इसके बाद झाडू को छिपा रख दें।
– घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें
– कलश में नारियल स्थापित कर, उसे घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखें
– पूजास्थल पर चौकी रखें और उस पर लाल / पीला वस्त्र रखें, लक्ष्मी पूजन में रखें।
– मांलक्ष्मी और श्रीगणेश जी की मूर्ति स्थापित करें तथा श्रीगणेश जी के दाएं ओर में मांलक्ष्मी को स्थान देना चाहिए।
– मांलक्ष्मी, श्रीगणेश को चंदन, अक्षत्, दुर्वा, सुपारी, नारियल, पीली कौड़िया, इत्र, गंध, लौंग, मिठाई आदि अर्पित करें
– दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ रखें। और पूजा के बाद इसे अपने तिजोरी में रखें
– महालक्ष्मी के महामंत्र “ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:” का 108 बार जप करें
– श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें
– लक्ष्मी पूजन के बाद घर के सभी कमरों में शंख / घंटी बजाए।

मांलक्ष्मी बीज मन्त्र – “ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।”
उपरोक्त मंत्र(108) एवं स्वाहा के उच्चारण के साथ हवन करें, हवन के पश्चात मांलक्ष्मी श्रीगणेश जी की आरती करके प्रसाद को मांलक्ष्मी एवं अग्नि देव को ग्रहण कराएं तत्पश्चात घर के सदस्य आरती लेकर बताशे, मिठाइयां, खील और शक्कर के खिलौने प्रसाद स्वरूप सभी में कर दे।

ज्योतिष महत्व
– दीपावली में गुरु अपनी स्वराशि धनु में और शनि अपनी स्वराशि मकर में विराजमान होंगे, अपनी स्वराशि में होने से धन संबंधी कार्यों में सफलता के योग का निर्माण करेंगे।
– शुक्र, कन्या राशि में नीचगत भाव से भ्रमण करेगा, इन तीन ग्रहों का यह दुर्लभ योग बहुत शुभता लेकर आया है
– दीपावली में, सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। यह शुभ स्थिति उत्तम फल देने वाली होती है।

माता लक्ष्मी प्रसन्न हैं यदि –
– दीपावली के दिन आपको कोई कन्या उपहार या सिक्का दे,
– दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू दिख जाए,
– दीपावली की रात छिपकली दिख जाए,
– दीपावली के दिन किन्नर आपके घर आये,
– दीपावली के दिन रास्ते में गिरे हुए पैसे मिल जाए,
– दीपावली के दिन आपके घर में बिल्ली का प्रवेश हो जाए

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munish-Mahendra

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My name is Munish Kr. Mahendra, and I have 15 yrs experience working of astro solution, remedies etc… I have a bachelor’s degree in Mathematics, English & Economics. I consider myself a good Astrologer, and I have a good sense of humor. People find me to be an upbeat, self-motivated with excellent communication skills.

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