हिंदू धर्म – हेमा पांडेय

हिंदू धर्म – हेमा पांडेय

हिंदू धर्म पूर्ण वैज्ञानिक धर्म है .श्रेष्ठ संस्कारवान मानव का निर्माण करना भारतीय संस्कृत का मूलभूत उद्देश्य है .प्राचीन ऋषि मुनियों ने मानव सभ्यता को सुसंगठित करने के लिए धर्म की पृष्ठभूमि पर कुछ नियम सिद्धांत बनाए. जिनमें शिशु के घर पर आते ही आत्मा पर छाई मलिनता को हटाकर उस पर नए संस्कारों को आरोपित करने की व्यवस्था बनाई. इसका उद्देश्य मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन को साकार करना और धार्मिकता के गांव की वृद्धि करना है .संस्कारों का प्रयोग ठीक उसी प्रकार किया जाता है जैसे किसी औषधि को अनेक बूट और भावनाएं देकर अमृत औषधि में बदल दिया जाता है. इस प्रकार गर्भ में आने से लेकर शरीर छोड़कर चीता में समर्पण तक तथा उसके बाद भी जीवात्मा को संभालने संवारने के विधान हमारे धर्म शास्त्रों में किए गए. क्योंकि आत्मा अमर मानी गई है जो व्यक्ति अपने जीवन में आनंद और उल्लास समृद्धि पूर्ण हों का आयोजन स्वर्ग में स्थान और अगले जन्म में श्रेष्ठ होनी पाना चाहता है .वह जीवन भर धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा रहता है .आत्मिक शांति ना तो अवैधानिक है ना ही काल्पनिक है. किसी भी वस्तु के लाभ महत्व और रहस्य को जाने बिना उस पर श्रद्धा आस्था और प्रीति ना होना स्वभाविक है .क्योंकि धर्म का आधार विश्वास और श्रद्धा पर ही टिका है तथा उसकी प्रवृत्ति हृदय से होती है. ऐसे में और विश्वास संदेश और भय रहने पर किसी वस्तु से पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता.

– हेमा पांडेय

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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