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वृंदावन का निधिवन -उमा मित्तल

मथुरा श्री कृष्ण जी की नगरी सचमुच देखने लायक है | हमारे भारतवर्ष में एक से बढ़कर एक अद्भुत देखने लायक जगह है, जिसमें एक है निधिवन |कहते हैं यहां श्री कृष्ण जी ,आज भी श्री राधा रानी और गोपियों के साथ रास रचाते हैं ,यानी स्वयं हर रात आकर नाचते गाते हैं और सुबह सभी गोपियां पेड़ और पौध का रूप धारण कर लेती हैं |यहां सभी पेड़ नीचे की ओर झुके हुए हैं ,जबकि पेड़ हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है |नीचे पेड़ सूखे हैं पर पत्तियां हरी हैं | इतना ही नहीं यहां मां तुलसी का पौधा 2-2 अर्थात जोड़े में बहुत अधिक मात्रा में है| तुलसी मां का पूर्व नाम वृंदा था |इसलिए ही इस जगह का नाम वृंदावन रखा गया है |श्री कृष्ण जी को तुलसी बहुत प्रिय है | निधिवन में एक रंग महल है |जहां राधा कृष्ण भगवान की मूर्ति है| उसी में एक लोटा जल, पुष्प, दातुन, पान , श्रृंगार का सामान रखकर मंदिर बंद कर दिया जाता है और सात ताले लगा दिए जाते हैं |सुबह जब मंदिर खोला जाता है, तब लोटे का जल खाली मिलता है | दातुन चबाए मिलते हैं|पान खाया हुआ होता है और पुष्प बिखरे मिलते है| इस गुत्थी को सुलझाने बहुत से वैज्ञानिक आए | क्या सचमुच रात को भगवान यहां आकर भोग लगाते हैं ,और निधिवन में रास रचाते हैं ? यह देखने के लिए वैज्ञानिक ने कई पेड़ को एक धागे से बांध दिया और अपना एक ताला लगा दिया , पर सुबह उन्हें धागा टूटा मिला अर्थात अनुमान लगाया गया कि रात को पौधे अपने स्थान से हिले होंगे |यहां शाम की आरती के बाद रुकना मना है |इंसान के साथ-साथ बंदर ,मोर ,पक्षी सभी आरती के बाद अपने आप बाहर निकल जाते हैं | ऐसा लोग रोज देखते हैं |यह भी अजीब बात है | अगर कोई भी निधिवन में रात को रुकने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता है |इसलिए उसे कोई भी देखने की गलती नहीं करता है | एक बार एक कोलकाता के व्यापारी ने रास देखने की कोशिश की और रात में वही छुप गया |सुबह पंडितों ने जब दरवाजा खोला तो देखा कि वह गूंगा हो चुका था |उसने इशारे से कलम और कॉपी मांगी और लिखा कि” उसने भगवान की बांसुरी सुनी, गोपियां और कृष्ण जी का रास उसने देखा और अब उसे कुछ संसार से मतलब नहीं है |उसके लिए भगवान कृष्ण जी से सुंदर इस संसार में कोई वस्तु नहीं है” और उसने प्राण त्याग दिए |हर रोज बांसुरी की आवाज आने पर भी गलती से भी कोई रास नहीं देखता है| हां, हर बार वैज्ञानिक न्यूज़ वाले आते हैं |पर हर बार भगवान के आगे नतमस्तक हो जाते हैं |इसी जगह पर एक विशाखा कुंड बना है| कहते हैं एक बार राधा जी की सहेली विशाखा को प्यास लगी |देखा कि आसपास कहीं पानी नहीं था |तब कृष्ण जी ने अपनी बांसुरी से जल खोदकर विशाखा जी को पानी पिलाया था |इसलिए इस कुंड को विशाखा कुंड कहते हैं | सचमुच ! निधिवन देखने योग्य है |
जय श्री राधे कृष्णा जी ||
उमा मित्तल
राजपुरा टाउन (पंजाब)

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