रोhit Singh

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" जिंदगी वो ख़्वाब है जिसका आंख खुलते ही हक़ीक़त से सामना हो जाता है "

New Delhi

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किसान हूं मैं
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मिट्टी में ही जन्

हिंदी कविता
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राह है...हिंदी...डगर ह

योगा दिवस विशेष
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आपने अक्सर देखा हो

अतीत को खुद से अलग रखें
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वजह नहीं हैं
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दर्द है पर कोई दवा न

अपने आप में ही खो जाना मेरा कभी हंसना तो कभी रो जाना मेरा
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'हम-हम'...हैं...आप नहीं हैं..!!
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'बैल'..'बुद्धि' है..हम

विराम चिन्ह का प्रयोग
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अगर तुम साथ हो...!!
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दर्द खुशियों का सम

नजदीकियां कम रखता हूं.....
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ना किसी के आने की उ

इस जिंदगी में बहुत से सफ़र है...
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जो‌ भी करो मन से करो सामना उसका हल से करो...!
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जो‌ भी करो मन से क

हर घर तिरंगा
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देखेगा इस बार यह ज

मुझे तुम रोकते क्यों हो....?
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आते..जाते..राहों में
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तुम वक्त ना बर्बाद करो
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किसी की बातों में

समझा पाया...
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ना वह समझे.... ना मैं

चलो आज दर्द के साथ भी थोड़ा मुस्कुराते हैं...!
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मन की खिड़की खोल नारी
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तुमने मुझे...खो दिया !
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तुमने मुझे..खो दिया.

तुमने मुझे..खो दिया
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मैं गलत हूं या सही हूं ..!
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गलत हूं या सही हूं