नवीनतम दुःखद रचनाएँ

चलो आज दर्द के साथ भी थोड़ा मुस्कुराते हैं...!
रोhit Singh
चलो आज दर्द के साथ भी थोड़ा मुस्कुराते हैं...! चलो आज दर्द के साथ भी थोड़ा मुस्कुराते हैं..... दर्द भी दर्द से दुःखी ह
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Date:
05-07-2022
Time:
09:55
वेदना
Abhinav chaturvedi
दर्द के आँसू, मन की बात कहते हैं। कई दफ़ा आंखों में दब कर, तो कभी बयां बहकर करते हैं। सीने में गुज़रे सारे लम्हे लफ़्ज़ो
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Date:
05-07-2022
Time:
10:01
दुख दर्द पीड़ा
ब्राह्मण सुधांशु sudh
मन मे चल रही अजब व्यथा है! शब्द भंडार मेरा मुझसे खफा हैं!! बोलना चाहता हूं खुदसे मगर! मै खुद ही चुप और शांत हूं!! उद
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Date:
05-07-2022
Time:
08:09
पछतावा
Ranjana sharma
रिया और अजीत की हाल में ही शादी हुई थी। अजीत मुंबई में जॉब करता था इसलिए शादी के बाद रिया को भी अपने साथ मुंबई ले आता
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Date:
05-07-2022
Time:
10:11
मदद
Ranjana sharma
मालिक-मालिक मेरी मदद कीजिए मेरी मां को बचा लीजिए। क्या हुआ तुम्हारी मां को।मेरी मां पेट के दर्द से तड़प रही है उसे ज
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Date:
05-07-2022
Time:
09:59
वृद्ध आश्रम
Afsana wahid (moin raza ghosi)
वृद्ध आश्रम इसका नाम सुनते ही आंखों में पानी आने लगता है दिल उदास हो जाता है कुछ लम्हे दो हम सोच में पड़ जाते हैं कि ज
48484
Date:
05-07-2022
Time:
08:46
Deepak Kumar
Deepak Kumar
हीरे को परखना है तो अंधेरे का इन्तजार करो. धूप में तो कांच भी चम्कता हैं ज़िन्दगी में लक भी उसी का साथ देता है जिसम
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Date:
05-07-2022
Time:
08:37
# अव्यक्त ...
चिन्ता netam " मन "
# अव्यक्त ... हुआ बहुत ही धोखा , इसमें ऐसा ही होता ...! कहीं-कहीं रात चांदनी , कहीं अंधेरा होता ...! प्रेम ग्रंथ के पन्ने ख
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Date:
05-07-2022
Time:
07:31
जीवन में क्या क्या देखा
सरफिरा लेखक
एक गरीब को छूपते छूपाते देखा मैने लेकर सौ रुपए ब्याज पर रोते रुलाते देखा मैने ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ घर की हालत ठीक नहीं
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Date:
05-07-2022
Time:
06:57
बेटी की पुकार
सरफिरा लेखक
मार गिराई जालिमों ने मैं चंद उम्र की बेटी थी कभी खेलती आंगन में कभी आंचल में लेटी थी। क्यों मार गिराए मुझे बस इत
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Date:
05-07-2022
Time:
10:03
ब्याज टक्का
Akshay verma
मे अक्षय वर्मा,मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मैं मध्यम वर्ग के परिवार से हूं ! मेरे परिवार में हम पाच लोग हैं,मैं मम्मी
46083
Date:
05-07-2022
Time:
06:57
हृदय की व्याकुलता
Ajay kumar suraj
हृदय की व्याकुलता मन हुआ है सागर मेरा,लहरों का सैलाब है भारी | डूब जाता मै अकिंचन,पड़ी दरिद्रता भारी भारी || दुःख
44072
Date:
05-07-2022
Time:
10:47