एक दिन ऐसा आएगा… Poem By Pranay Kumar

एक दिन ऐसा आएगा… Poem By Pranay Kumar

एक दिन ऐसा आएगा… न कोई किसी के हँसी पर पावंदी लगाएगा न कोई किसी के ख़ुशी पर पावंदी लगाएगा जिंदगी होगी अपनी, सलीका होगा अपना, सोच होगी अपनी, रास्ता होगा अपना, एक दिन ऐसा आएगा… निकलेंगे सभी अपने काम पर, पहुंचेंगे किसी न किसी मुकाम पर, न लेंगे किसी का सहारा, न मानेंगे कभी
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चलते रहना है Poem by Pranay Kumar

तुम्हें न दौड़ना है, न रुकना है, बस चलते रहना है, रास्ता अभी बाँकी है । तुम्हें न डरना है यह सोच कर कि आगे क्या होगा ? बढ़ते रहना है अपनी मंजिल की ओर, तुम्हें कुछ न भी मिला तो क्या ? तजुर्बा पाना अभी बाँकी है । बहुतों ने बहुत कुछ कहा होगा
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संघर्ष Poem By Pranay Kumar

संघर्ष भरा जीवन है यह, मंजिल तक पहुँचने में थोड़ा वक्त लगेगा । किस्मत के जंग लगे दरवाजे खुद नहीं खुलते, उन्हें खोलने में थोड़ा वक्त लगेगा । रिश्तों के जख्म को देख कर निराश मत हो, उन्हें भरने में थोड़ा वक्त लगेगा । अपने नेक लक्ष्य से न भटक,जो तू कर दिखाना चाहता है
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