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Chetan verma

रोकूंगा नहीं मैं-चेतन वर्मा

तू कहेगी हंस तो हंस लूंगा मैं तू कहेगी नाच तो नाच लूंगा मैं फिर भी छोड़ जाएगी तो तेरी मर्जी रोकूंगा नहीं मैं… तारे गिन कर भी चांद को ढूंढ लूंगा मैं अंधेरे को छोड़ उजाले में भी हाथ नहीं छोडूंगा मैं फिर भी छोड़ जाएगी तो तेरी मर्जी रोकूंगा नहीं मैं… तेरे होठों …

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खुद के पैरों पर-चेतन वर्मा

चलना था… खुद को खुद के पैरों पर मैं आस करूं क्या अब गैरों पर..? बहुत हंसती थी, जब गिरता था, खुद उठता था, समलता था, मुझे खुशबू वाली इत्र देकर खुद ही खुद वह महकती थी, मेरी नजरों में वह अप्सरा थी उसकी नजरों में खिलौना था, मेरी रातें उसकी यादों में उसकी रातें …

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तारे- चेतन वर्मा

मैं तो यूं बैठा अकेला तारे गिन रहा हूं उलझा हुआ हूं खुद मगर खुद ही सुलझ रहा हूं मैं तो यूं बैठा अकेला तारे गिन रहा हूं… रात के अंधेरे में भी वफा ढूंढ रहा हूं कैसे कह दूं खुद हूं तन्हा खुद में डूब रहा हूं मैं तो यूं बैठा अकेला तारे गिन …

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मैं शाहजहां-चेतन वर्मा

मैं उड़ने को बेताब हूं, मैं शाहजहां मुमताज है कहां तू… मैं भी सपनों में यू बहता रहा कोई दिल में मेरे है पर है कहां तू मैं उड़ने को बेताब हूं, मैं शाहजहां मुमताज है कहां तू… तेरी गलियों से मैं गुजरा हूं सन्नाटो में है कहां तू मेरे दिल की हर धड़कन में …

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पहली मुलाकात-चेतन वर्मा

सफर खूबसूरत होने लगा जब से हुई पहली मुलाकात दफा यह है मेरा कोई स्वप्न ही सही हकीकत मैं इंतजार होने लगा बदलू ना राहों को मंजिल मिले कांटे सही फुल मुफ्त में मिले कर के दफन याद अब मैं तड़प के सिरहाने पे सोने लगा ख्वाबों में नींदे परेशान हो गई टूट कर खुद …

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मेरी आंखों-चेतन वर्मा

मेरी आंखों को पढ़ लो ना शिकायत रोज करती है थोड़ा देखो मुझे मुड कर हकीकत यू छलकती है कोई दीदार है तुमसे शिकवा अब नहीं खुद से मोहब्बत चीज ऐसी है गिना देती है तारे दिन में कोई हमसफ़र है तुम्हारा तुम्हारी चाहत में खोया मैं कोई गैर ही सही मायूस होकर यू मुस्कुराता …

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दिवाली-चेतन वर्मा

कुर्ता भी लाऊंगा पजामा भी लाऊंगा इस दिवाली घरवाली नहीं लाऊंगा अभी थोड़ा पढ़ूंगा-लिखूंगा केरियर बनाऊंगा जिंदगी के रोजमरे से अलग करके दिखाऊंगा थोड़ा-थोड़ा करके बहुत कुछ करना है जिंदगी के रंग में दिवाली में मनाऊंगा सुख नहीं चाहिए दुख नहीं चाहिए अंधेरे और उजाले में दीपक जलाऊंगा ठाकुरों से लेकर सबक मुश्किलें मिटाऊंगा कुछ …

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जोकर-चेतन वर्मा

जोकर हूं मैं सर्कस है तू मैं कुछ नहीं सब कुछ है तू जोकरो कि दुनिया से प्यार करके देखिए सर्कस के खेल में सर्कस तो खेलिए झूम-झूम नाच-नाच पहेलिया बुझाता हूं कुछ नहीं खुद मुरझा सबको हंसाता हूं नाक पर लगाकर लाल-लाल मनोरंजन कराता हूं खूब उछलता-कूदता हूं और भूखा सो जाता हूं सर्कस …

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मेरी मां-चेतन वर्मा

कुछ नहीं सब कुछ है मेरी मां घुटनों से रेंग-रेंग कर चलना चाहता था पकड़ के उंगली जब मैं दौड़ना चाहता था साथ खड़ी आहे भरती थी हौसला मेरा बुलंद करती थी वही तो है मेरी मां प्यारी मां कुछ नहीं सब कुछ है मेरी मां… जब मैं छोटा बच्चा था बिस्तर गीला कर देता …

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अरे यारों-चेतन वर्मा

यह जिंदगी भी क्या चीज है तुम्हारी हर अदा की मोहताज है … तुम्हारे दिल की बदौलत है कुछ एहसान है कुछ फरामोश है तुम हो कमीने मैं जानता हूं एक भी शरीफ नहीं यह मैं पहचानता हूं कुछ के रंग तेवर दिखाते हैं कुछ के तेवर में रंग में जानता हूं अरे यारों यह …

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मुसाफिर-चेतन वर्मा

मैं मुसाफिर तेरी गलियों का कोई आवाज ना देना डगमगा जाए कदम मेरे तो संभाल तुम लेना अगर आवाज में ना हो दम तो हौसला बुलंद तुम कर देना मैं मुसाफिर तेरी गलियों का कोई आवाज ना देना… जब गुजरूगा उस रास्ते से तो पहचान मंजिल को लूंगा फिर भी धोखा दे दे अगर किस्मत …

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लफ्ज – चेतन वर्मा

मेरे दिन गुजरते नहीं तेरी रात आराम से कट जाती है क्या मुकम्मल कर लिया ऐसा जो होता हूं तन्हा में और तू मुस्कुरा कर चली जाती है… तेरे ख्वाब आते हैं अक्सर रातों को सोने तो दूर हिलने तक नहीं देते हैं मेरे रोते दिल से लफ़्ज़ खुद पर खुद बह जाते हैं जाते …

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