गलत क्या-चेतन वर्मा

गलत क्या-चेतन वर्मा

इस जहां में चांद भी अधूरा है  चांदनी के बिना  सारी दुनिया में गम है  गम में हम हैं  और हम भी रो दिए  तो गलत क्या सबको आस है सच्चे प्यार की  प्यार में थोड़ा हम भी भटक गए  तो गलत क्या    यूं तो जिंदगी में बहुत कुछ मिलता है  पर जो हाथों
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गलत क्या👊…(चेतन वर्मा)

इस जहां में चांद भी अधूरा है चांदनी के बिना सारी दुनिया में गम है गम में हम हैं और हम भी रो दिए तो गलत क्या सबको आस है सच्चे प्यार की प्यार में थोड़ा हम भी भटक गए तो गलत क्या यूं तो जिंदगी में बहुत कुछ मिलता है पर जो हाथों की
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मोहब्बत की शिकायत-चेतन वर्मा

मोहब्बत की शिकायत  अब तो दिल से खेलने वाले करते हैं    दिल में सजाकर अपने सपने  दिमाग से इस्तेमाल करते हैं  बगल में बिठाकर किसी और को  कांधे पर माथा रख कर सोते हैं  दिल पर क्या गुजरती है तन्हा बताऊं कैसे  आंसू छुपा कर होठों से मुस्कुराया करते हैं  रिश्ते की शुरुआत में
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बेटियां..👩(चेतन वर्मा)

ओस की बूंद से भी नाजुक होती है बेटियां भला बुरा न कहा करो इनको अपनी मां बहन भी होती है बेटियां … मन के मंदिर में भगवान बसता ऐसी प्यारी वंदनाए होती है बेटियां बेटों से कम नहीं श्रृंगार की मूरत होती है बेटियां रोशन करता बेटा एक कुल को तो दो-दो कुल की
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काश मेरे लिए…(चेतन वर्मा)

इस जहां में, सब के लिए कुछ ना कुछ बनाया मेरे खुदा काश मेरे लिए भी एक मूरत बना देता… रख लेता दिल में बिठा के फटे पुराने तकिए के नीचे छुपा के नजरों के नीचे पलकों पर सजा के जिसके आने की आहट ही दिल को तार बेतार कर दे ऐसी मन मोहिनी सूरत
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इश्क का इंतिहान…(चेतन वर्मा)

मत ले मेरे इश्क का इंतिहान पगली हार जाएगी, नफरत की आग में तू जल रही है, जली हुई कश्ती पर तू चल रही है , बदल के करवट जो तु मचल रही, समझ रहा हूं मैं हाल एक तरफा, रखकर तकिए के नीचे सर जो तू हंस रही है। समझ रहा हूं मैं तेरा
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नसीब ( चेतन वर्मा )

जिंदगी ताश के पत्ते हैं जिसमें मिलता वही है जो हम बोते हैं सब कुछ खोते हैं पर पाते वही है जो नसीब में लिखे होते हैं… कुछ के नसीब में बेगम- बादशाह होते हैं कुछ के रंगों में बेरंग पत्ते होते है और कुछ के हाथों में रंगीन लाल काले अककै होते हैं पर
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जिंदा मेरा विश्वास… (चेतन वर्मा)

कदम कदम पर मौत हुई जिंदा मेरा विश्वास रहा छोड़कर दुनियादारी को मैंने जय श्री राम का नाम लिया अटल हिमालय जैसा अड़ा मुसीबतों का पहरा खड़ा मिलने वाली हर विपदा का नया-नया उपचार किया सुबह से उठता शाम को सोता दिन भर धूपधाप में खोता पैदल पैदल चलकर मैंने सीख लिया कुछ ज्ञान न्यारा
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ठोकरे…(चेतन वर्मा)

ठोकरे खा खा कर चलता हूं , रात को भी दिन समझता हूं , चलना तो कांटों पर ही है , फिर भी जाजम की आस करता हूं । होकर मायूस रखकर दिल पर पत्थर , बेवफा की गली से रोज गुजरता हूं , उनके चाहने वाले हजारों है, मेरे ना होने की कमी महसूस
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मेरा दिल कोई खेल खिलौना नहीं..(चेतन वर्मा)

मेरा दिल कोई खेल खिलौना नहीं , जब मर्जी उपयोग कर लिया । अपना मन हुआ तो बात की वरना, स्विच ऑफ करके रख लिया । तुझे पता भी होता है , मेरा ,मेरा दिल कितना रोता है तुझे ख़बर क्यों नहीं , या फिर किसी और पर मरती है । रात मेरी करकरी करके,
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