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Deep Jangra

देर ना लागै-दीप जांगड़ा

बेशक हो बोल बाला जग मैं राख़ होते देर ना लागै अपणा अपणा दिखे जा सै साख़ खोते देर ना लागै भजन करे तै राम मिलै ना माँ बाप के चरण पकड़ ले दान करे तै धन होवै एक तै लाख होते देर ना लागै संस्कारां मैं बंधै जो आत्मा पाक होते देर ना लागै …

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सोने का भारत-दीप जांगड़ा

रक्षक पर पत्थर बरसाना प्रमाण है कायर होने का कसमों वादों में लूट बैठा वो भारत जो था सोने का अजब मिला है सबक देश पर प्राण न्यौछावर करने का दुश्मन से लोहा लेने वाला हुआ शिकार एक धरने का किसकी है बिसात खेल ये कौन जमाये बैठा है है कौन फ़िराक में सत्ता की …

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बेआबरू चमन-दीप जांगड़ा

बे आबरू चमन बे अदब सी इंसानियत नज़र आती है अज़ब सा हूनर आया है हवाओं में भगावत नज़र आती है अब नही चमकती रूहें आसमान में साँझी छत अँधेरी हो गई रिश्तों में रस नही रहा अब तार तार इज्जत नज़र आती है ग़ुनाह की आग़ोश में है हर शख़्स ख़ौफ़ की लत नज़र …

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पत्थरबाज़ लुटेरा-दीप जांगड़ा

मैं वतन का सिपाही ओर वो बेरहम पत्थरबाज लुटेरा था कितनी बार उस बेग़ैरत ने करी चढ़ाई ओर मुझे घेरा था मैं चलता रहा अपने फ़र्ज़ की राह पर लड़खड़ाता रहा अपनी बंदूक को सीने से लगाये मैं सहमा सा जाता रहा थी गोलियां बहुत मेरे बस्ते में अग़र चलाता तो जीत जाता मैं पर …

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मानव धर्म-दीप जांगड़ा

मनै तै तू चाँदणा दिखाई जा भला तारयां का मैं के करूँ गा आपणे ज्ञान के समुन्दर मैं डबौ ले किनारयां का मैं के करूँ गा दो जून की रोटी सुख की खुवाई जा भंडारयां का मैं के करूँ गा सर पै हाथ तूँ राखीये सच्चे मालिक सहारयां का मैं के करूँ गा दुःख दे …

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गांव बंद- दीप जांगड़ा

दुनिया तै कमा कै खुवाण का धर्म निभाता देख्या सै एक किसान अपणे हक़ ख़ातर धक्के खाता देख्या सै आपणे ज़मीर पर कै लखाती भींता जिसा होगया नींव मैं लागी होई बोदी पिल्ली ईंटां जिसा होगया दुखां की चादर मैं सुख लपेट कै धरया करता यू वोहे ज़मीदार सै जिसपै भगवान भी आस करया करता …

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भारत बंद-दीप जांगड़ा

इब भाईचारे निपट लिए हर बार पै भारत बंद होगे । नीयत फीटक की लोगां की लालच मैं मन्दे मन्द होगे ।। कोई मर्यादा ना रही बीर की ना शब्द रहया बड़ाई का झूट नीचता बिकण लाग गी ना मिलै गाहक सच्चाई का ज़मीदार के घर मैं जनमै बालक बदमाशी मैं नाम कमावै नाम डूब …

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तबाही-दीप जांगड़ा

मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम बालकां की तरियां पाली थी तनै कर दी आज तबाही राम फ़ेर लोग कहैंगे बस फूकै जब हक़ अपणा मैं माँगूँ गा कद तक अपणे गल मैं राम मैं कर्ज़ की ज्योडी घालूँगा क्यूकर इब ढूँड़ चलाऊं मैं इब कित तै खाण नै …

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भगत सिंघ-दीप जांगड़ा

आंगण बीचालै ठंडे रूख की सीली छाँ बरगी थी । जिस कौख तै जन्मया भगत सिंघ वा माँ भी माँ बरगी थी ।। वा ज्योत थी जिसकी लो दिखला गी चांदना आज़ादी का हाल देख री थी वा माँ लोगों भारत की बर्बादी का कदे भीतर कदे बाहर मरैं थे खेत बाढ़ नै खाया था …

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सत्य पुरुषार्थ-दीप जांगड़ा

पत्थर धर कै छाती पै दुखां नै गल कै लाये जा । कदे हांसे जा कदे गाये यू जनम ठिकाणे लाये जा।। बोल प्रेम के मीठे मीठे जिसे बोल्लै कोए उसे सुणादे ज़हर काढ़ दे भीतर का तू बाणी मै रस घोल दिखादे फ़र्क भूल ज्या ऊंच नीच का सीधी नीत कमाये जा ।। कदे …

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अर्थी अरमानां की-दीप जांगड़ा

आज सांझ के सीलै मनै एक अर्थी जाती देखी हैं छोटी छोटी दो आस आंख तै ख़ून बहाती देखी है आज जो भी हर्फ़ सुणै थीं उन मैं दर्द भरया पड़या था तड़कै स्कूल मैं हँसदे नै छोड़ कै गई थी इब अर्थी पै पड़या था दूर तै देखते ही बालकां का भीतर पाट पाट …

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मानव धर्म-दीप जांगड़ा

मनै तै तू चाँदणा दिखाई जा भला तारयां का मैं के करूँ गा आपणे ज्ञान के समुन्दर मैं डबौ ले किनारयां का मैं के करूँ गा दो जून की रोटी सुख की खुवाई जा भंडारयां का मैं के करूँ गा सर पै हाथ तूँ राखीये सच्चे मालिक सहारयां का मैं के करूँ गा दुःख दे …

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