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Disha Shah

आज के समय में स्वरोजगार-दीशा शाह

आज के समय में स्वरोजगार होंना बोहोत जरुरी है आप कोई भी नौकरी ४साल ५सल पूरी ज़िन्दगी तोह एक नौकरी के सहारे नहीं जी सकते , खुद से कुछ करना स्वरोजगार बनना खुद के लिए काम करना . कुछ नया करते है व्यवसाई करते है उसमें निर्णय ,काम ,विचारसिर्फ हमारा ही होता है ,खुद के …

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बच्चे होते है सच्चे-दिशा शाह

बच्चे होते है सच्चे , कभी जुठ नहीं बोलते है बच्चे होते है मासूम , कि हर कोई उससे बुलाते है सब के साथ घुलमील जाता है , दिल के साफ होते है बच्चे , बच्चे भगवान का स्वरूप होते है बच्चे सब के चेहरे में मुस्कराहट लेके आते है , बच्चे बड़ो के ग़ुस्से …

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कोई भि बच्ची लड़की औरत सुरक्षित नहीं है-दिशा शाह

आज कल कोई छोर लड़की , बच्ची औरत , बुजुर्ग कोई ,भी सुरक्षित नहीं है . हर रोज कोई ना कोई बच्ची , किसी दरिंदे की जाल में फस जाती है . १सल ,४ साल की बच्ची को छोर छोर ते नहीं है इतनी भी इंसानियत नहीं होती है क्या गुजरेगी नन्ही सी जान में …

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बदलते परयावरण की समस्या -दिशा शाह

आज कल बोहोत शहरो में हो रही है . इसकी वजह ये है ,की आजकल हर जगह शहरों में बिल्डिंग, फैक्ट्री की संख्या ज्यादा हो रही है . पेड़ पोड़े , जाड़ को काट दिया जाता है , नए नए मकान बनाने के लिए .पेड़ की संख्या बिलकुल कम होती जा रही है पुरे भारत …

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त्यौहार साल मैं-दिशा शाह

त्यौहार साल मैं एक बार आता है चाहे नवरात्री / दुर्गापूजा हो या दिवाली हम सब त्यौहार धाम धूम धाम से मनाते है , बहार घूमने खेलना , गरबा खेलना , फिर पंडाल घूमने जाना बोहोत अनोखा सजावट का पंडाल देखने को मिलता है अभी नवरात्री / दुर्गापूजा का त्यौहार खत्म हुआ , आएगा दिवाली …

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आज के समय में-दीशा शाह

आज के समय में कोई किसी का नहीं लोग मतलब के लिए बात करते है , अपना मतलब खत्म , अपना असली रूप दिखा देते है , इसमें कोई कोई अच्छा भी होता है , आज के समय में अच्छा लोग कम देखने को मिलते है कुछ अच्छे भी होते है , देश के लिए …

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ज़िन्दगी में हर पल -दीशा शाह

ज़िन्दगी में हर पल अनोखा होता है कभी गुस्सा हो जाते है कभी ख़फ़ा हो जाते है कभी मुस्कुराहटें है कभी मजाक करते है हर दिन अनोखा होता है हर दिन का मजा अलग होता है हम उमीदो लेकर जीते है हम जीते है अपनी ख्वाइश को पूरी करने के लिए . अपना सपना पूरा …

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आज के बदलते समय में-दीशा शाह

आज के बदलते समय में आज भी लोग लड़के लड़की में भेदभाव करते है . आज भी ऐसा होता है , लड़के को ही जन्म ले ऐसा , सोचते है , अगर गलती से भी लड़की जन्मे तोह उससे मार देते है ,या कुदपेति में फेक देते है . क्यों ऐसा करते है लोग , …

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त्यौहार के समय-दिशा शाह

आज कल कोई भी त्यौहार , आया क्या नहीं , म्यूजिक शुरू कर देते है , ढोल नगारा जोर जोर से म्यूसिक बजाते है . इससे सब से ज्यादा तकलीफ , गुजुर्ग को होती है , और जिसकी परीक्षा होती है उनको बोहोत डिस्टर्ब होता है पढ़ने में , थिक से अपना ध्यान नहीं दे …

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भारतीय अर्थव्यवस्था-दीशा शाह

आज के समय में पैसा इतना आवश्यक हो गया है की लोगो को केवल पैसो से मतलब है .भारत की संस्कृति मर्यादा ,विनय, विवेक , बड़ो छोटो के साथ आज कल ये नहीं दिखाई दे रहा है . लोगो को सिर्फ पैसा को जरुरी समजते है . इज्जत मर्यादा मानसन्मान सब भूल गए है . …

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मेकअप के शौकीन-दिशा शाह

मेकअप हम महिलाओ के लिए बोहोत जरुरी है . हम् थोड़ा भी दूर जाते है . हम मेकअप कर के जाते है . हम् महिलाओ को तैयार होने में बोहोत व्यक्त लगता है , क्यों की हम को सब से उत्तम /खूबसूरत दिखना होता है .हम मेकअप के बिना एक पल भी रेह नहीं सकते …

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हिंदी भाषा का महत्त्व-दिशा शाह

आज के समय में हिंदी भाषा को कोई माहत्व नहीं देते है . कितने ऐसे लोग है ,उन्हें हिंदी लिखना तोह दूर की बात है , बोलना भी नहीं आता है . आज कल अंग्रेजी भाषा बोहोत आवश्यक है , यहाँ हिंदी भाषा की कोई वैल्यू नहीं है , हिंदी को कोई पूछता भी नहीं …

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