नहीं सीखा Gazel By Rahul Red

नहीं सीखा Gazel By Rahul Red

तनहाई की महफ़िल में मुस्कान नहीं सीखा नाजुक फूलों सा कभी मुरझाना नहीं सीखा टूटा हूँ बहुत लेकिन गिर-गिर के सम्भला हूँ कैसी भी हो राह मगर रुक जाना नहीं सीखा भूल गए वो लोग जिनका साथ दिया हर पल उनकी तरह मैंने अहसान जताना नहीं सीखा कड़वा सच बोलता हूँ भले नफरत करे जमाना
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बदनामी Gazel By Rahul Red

महफ़िल सजा ली यारों की, तो हुई बदनामी बगिया खिला ली बहारों की, तो हुई बदनामी यह कैसा समाज, जो बदनाम करता फिरता है? मदद कर दी बेसहारों की, तो हुई बदनामी। किसी पे दिल अगर ये मर लिया, तो हुई बदनामी बाँहों में किसी को भर लिया, तो हुई बदनामी। बदनामी के दौर में
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