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Tag: Jitender Shivhare

छूं आसमान ओ बेटीयों-जितेंद्र शिवहरे

छूं लो आसमान ओ बेटियों लो खूद को पहचान ओ बेटियों नारी शक्ति दुनिया जान चुकी कितनी वीरांगनाएं ये मान चुकी हो तुम्हारा भी गुणगान

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गज़ल- जितेंद्र शिवहरे

महबूब मेरे मुझे बस दूर से देखते है दिल जलता है यहां वो वहां आंखे सेकते है। तारिफ में कितने कशीदें पढ़े है मैंने तुम्हारी

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श्मशान घाट -जितेंद्र शिवहरे

संसद भवन में नेताजी पर विपक्ष जोरदार प्रहार कर रहा था। “गांव के विकास और उन्नति के लिए नेताजी ने आज तक कुछ नहीं किया।

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गज़ल- जितेंद्र शिवहरे

क्या खूब दिलबर दुश्मनी को अंजाम देते है हुस़्न का तेवर दिखा आंखों से जाम देते है। होठों पे आ पाये जो अल्फाज मुश़्किल है

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नोकझोंक- जितेंद्र शिवहरे

(लड़का) हमने पी जो शराब तो मयखाने खाली हो गये पीते पीते शराब के समुन्दर नाली हो गये। (लड़की) हमने फेंका गुलाब तो तुम जैसे

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लोरी-जितेंद्र शिवहरे

आँखों में सपने लेकर के सोजा सोजा नन्हे मुन्ने सोजा। दिनभर तू जागा है आंखों को खोले भागा है आंगन में तुतला के बोले फूलों

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