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Kavita Yadav

माँ और मैं-कविता यादव

माँ का सायां हर पल साथ रहता है मेरे, माँ ही है वो जिसका सिर पर हाथ रहता है मेरे। माँ करूणा की वो मूरत है, देखकर कष्ट मेरा तडफती है। मैं जो तडफूँ कहर माँ के दिल में उठती है। जब भी हारूँ जिंदगी से, माँ मुझमें नई आशाएँ भरती है। माँ का सायां………….. …

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जीवन-कविता यादव

कभी न सोची वो कहानी बन गयी…. अधलिखि अधूरी सी वो अनजानी बन गयी…. ना जाने कहाँ – कहाँ से गुजर कर निकलगयीं… ना चाहते हुए भी वो दर्द सह गयी ….. कभी उलझी तो कभी पल में निकलगयीं….. कभी रोई तो कभी हँस कर गुजर गई …. वो कोई और नही जीवन ही है …

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दोस्ती – कविता यादव

दोस्ती प्यारी होती है, इसे प्यार से निभाना है हमें। ना रहे हम साथ मगर, दिल से निभाना है हमें। मिलते है कहाँ आज की, भागम – भाग में हर कोई। ढेरों काम रहते है कहते है हर कोई, दोस्ती ऐसे ही तोड़ी नहीं जाती है। और दोस्ती के रिस्तो में, कोई रिश्ते जोड़े नहीं …

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सपना-कविता यादव

डूबती हुई नाव को किनारा मिल गया …. आप ने हाथ बड़ाया तो सहारा मिल गया …. आज कल की भागमभाग से जीवन में … कोई नहीं रुकता आप के लिए…. जिसने वक्त निकाला उसकी बात ही निराली है … देखिये गौर से वो इंसान के नाम पर वो रब तो नहीं है… या रव …

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शिक्षित बेरोज़गार-कविता यादव

हमारे देश में शित बेरोज़गार की समस्या एक गंभीर रुप ले रही है ,अशिक्षीत बेरोजगार के साथ आज हमारे देश में शिक्षीत बेरोज़गार भी गंभीर समस्या है , आज हमारे देश में लगभग 14.30 करोड़ युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे है और ये कम होने की बजह दिन ब दिन बड़ती हीं जा …

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मीठा बचपन -कविता यादव

बचपन की अठखेलिया बचपन की शरारत भूलना यू आसान है ,पर बीत चूका जो बचपन भूलना ना मुमकिन है …….. बचपन की गुड़िया ,बचपन के खिलोने भूलना यु आसान है ,पर बीत चुकी जो मस्ती भूलना ना मुमकिन है …….. बचपन का वो घर – घर का खेलना ,और पिड्डू का खेलना भूलना यु आसान …

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सर्दी या परिस्थति-कविता यादव

हमारा जीवन हमें प्रतेक परिस्थिती में ढलना शिखा देता है ,पर उनके बारे में सोचिये जो परिस्थिती में ढलना चाहे तो भी वो उसमे ढलने में सक्षम नहीं हो पाते उनकी परिस्थीती उन्हें उसमे ढलने नहीं देती , में उन् गरीब बच्चो के बारे में बात कर रही हूँ जो अक्सर मंदिर चौराहे पर हमें …

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कुछ पल ठहरा कुछ पल रुका था-कविता यादव

कुछ पल ठहरा कुछ पल रुका था ख़ामोशी में शायद वो थम सा गया था कुछ पल ….. रोके अगर तो वो रुकना ना पाए वो वक्त ही है जो बस चलता जाए .. कुछ पल वो ठहरा कुछ पल रुका था.. ख़ामोशी में शायद वो थम सा गया था … तन्हाई क्यु उसे काटी …

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कश्मीर ,मेरा नज़रिया – कविता यादव

जम्मु कश्मीर उत्तर भारत का राज्य ,जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है , ऊसी स्वर्ग की हालत आज बत से बत्तर होती जा रही हैं, कीसने किया उसकी ये हालत अगर हम ध्यान से सोचे तो समझ ही जायेगे आंतकवाद , ,इस आंतकवाद ने आज काश्मीर के लोगो को घर से निकलना मुश्किल कर …

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कशमीर – कविता यादव

काश्मीर ओ काश्मीर ,तुम तो बोहोत ही सुन्दर हो मुग्लो द्वारा नामित तुम धरती का स्वर्ग हो .. हिम स्थल और ढेरो पर्यटन स्थल लिए हो .. पुज्नीये वैष्णो देवी मन्दिर ,बुल्लर ओर डल झील लिए हो … क्या हुआ अब तुमको क्यू ए तेरा हाल है … किसके द्ववारा किया गया ,तेरा बुरा ए …

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कैसी है जिंदगी – कविता यादव

अदभुत अविचल अचरज भरी , कैसी है ये जिंदगी कभीं हसायें कभी रूलाये ,कैसी है ये जिंदगी जो कुछ हम दिल से चाहे , वो हाथों से फिसली जाए अदभुत अविचल अचरज भरी कैसी है जिंदगी…. कभी ,तो आँख भर आये ,कभी आसमानो पर उड़ाए ख़ुशी मिले कभी ऐसी ,कभी जो हम करना न चाँहे …

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देश में पानी की समस्या – कविता यादव

दीन प्रतिदिन बड्ती जाए, बहुत बडी समस्या है आज अगर ना पकडी डोर , तो कल बडी ए घटना है जमीन ने सोक लीया , तो सोचो क्या हो जायेगा ऍक ग्लास ानी पीा भी, बोहोत मुश्किल हो जायेगा . हम अन्न कहा से ￰खायेंगे, और खाना कैसे बनाएंगे जीवन की सारी दिनचर्या को , …

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