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Tag: Kiran Bhandari

सुनो मेरी गुडिया-किरन भंडारी

ख्वाहिशों को तुम पंख बनाकर नए हौसले बुलंद करना अपनी उम्मीदों की तुम उड़ान भरना… लाख डराए लाख सताए ये जमाना चाहे लडकी होने का

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अभिव्यक्ति-किरन भण्डारी

हे प्रभु हे इश्वर हे मेरे अराध्य.. ये कैसी आशंकाएं हर पल मेरे अंतर्मन अंधियारा फैलाए जीवन मरण के मोह में फंसकर मेरी भक्ति डगमगाए

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गजल-किरन भण्डारी

सायबा सुनो जरा ना इस कदर हमें बेकरार किजिए नींदो को मेरी ना बेजार कीजिए मूरीद हूं मै ,करूं सजदा तुम्हारा खुदा इश्क का तुम्हें

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मेरे तन्हा अल्फाज-किरन भण्डारी

यूं तो शहरों में भी भोर के पंछी करते है कलरव..”” ध्वनि प्रदुषित दिशाएंं परिंदों का शोर सुनने नही देती…!! सूरज भी लाता है किरणों

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कमाल का जोश गजब का उत्साह -किरन भण्डारी

“”कमाल का जोश गजब का उत्साह मेरे देश में चहुँ ओर था महिने महिने भर पहले से ही #क्रिसमस तो कभी #न्यूईयर का शोर था…

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कविता, रिश्तों का एतबार-किरन भण्डारी

बदल जाते हैं जब बातों के मायने लफ्जों मे फिर प्यार नही रहता !! बेरुखी के साये में धुंधला जाता है यकीन रिश्तों में मुकम्मल

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