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तो क्या मैं अब ख्वाब देखना ही छोड़ दूं -सौरभ लखनवी

माना कि राह मुश्किल है मंजिल की बहुत, तो क्या मैं अब ख्वाब देखना ही छोड़ दूँ ? तमाम लोग शिकश्त खाकर बैठ गये है यहाँ, सिर्फ इस वजह से मैं भी कोशिश करना छोड़ दूं ? “उसकी” रहमतों से मंजिल के करीब पहुँच गया हूं मैं, और तुम ये कहते हो कि “उसपे” यकीन …

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मेरी पसंद मेरी कविता-सोनमणि देबनाथ

पसंद है मुझे कविता, जिसे पढ़कर मे हर रोज जीता ,पता नहीं कविता लिखे बिना कुछ दिन मेरे कैसे बीता, कविता की दुनिया में मुझे अब रहना है ,कविता लिखकर ही मैं एक दिन कुछ बनूंगा बस यही मेरा कहना है.

रक्षा बंधन -सोनमणि देबनाथ

जिस भाई के कलाई पर है राखी के धागे । हर मुसीबत उससे दूर भागे। बहन तेरी आज बांध रही है, तेरे हाथ पर राखी की डोर। तोफा तुझसे यह चाहो तू , मेरे भरोसा कभी ना तोड़। जैसे मैंने तेरे हाथों पर बांदा यह धागा। तूने मुझे दिया रक्षा का वादा। यह वादा तू …

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बाल हत्या -सोनमणि देबनाथ

मैं तेरे कोख में हूं मां। मुझे इस दुनिया में तुला। गलती मेरी क्या थी ऐसा मैंने क्या किया। जो दीपक जलने से पहले तूने उसे बुझा दिया। बच्चों को तो मां ने हमेशा खुद से ज्यादा प्यार दिया। फिर मुझको क्यों इतनी बेरहमी से मां तूने मार दिया। यू तो मां बच्चों की आवाज …

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जब हम छोटे थे, घर के छोटू थे – राहुल रॉक्स

जब हम छोटे थे, घर के छोटू थे, हुनर का पंख मेरे भी लगा था , जब हम छोटे थे, छोटी सी आंखो में , बड़े सपनों का विमान लेके घूमते थे, चलाना ना आता था, जीवन की गाड़ी , ड्राइवर के रूप में पापा को देखते थे, तनाव भरी जिंदगी में , बहुत सी …

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माता पिता जैसा कोई नहीं बच्चे यह कब समझेंगे – सोनामोनी देबनाथ

माता पिता वह जन्मदाता है। जिनके द्वारा हर इंसान धरती पर आता है। जिन्हें सिर्फ अपने बच्चों को, खुशियां देना आता है। पिता तो वह है जो बच्चों की खुशियों के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करता है। और अपने बच्चों के चेहरे पर खुशी देखकर अपने हर कष्ट भूलाता है। लेकिन अफसोस आज कुछ …

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भारत की जान वीर जवान -सोनमणि देबनाथ

मां मुझे आशीर्वाद दे आज, तूने मुझे जन्म दिया। तेरा बेटा आज भारत मां की, रक्षा की वर्दी पेहेन लिया। आज पूरी भारतवासी मेरा अपना है। मेरे अपनों की रक्षा में कर पाऊं, बस यही एक मेरा सपना है। अब इजाजत दे खुद को, तैयार मुझे करना है। अपने देश के रक्षा के लिए, सरहद …

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सुशांत कास लट आए

कोई इस तरहा मत जा। कि पागल हो जाए तुम्हारी मां। सुशांत की मां नहीं हे लेकिन बाबा बहन परिवार तो था। कैसे चला गया छोड़कर। उनसे भी मुंह मोड़ कर। पता नहीं क्या था उनकी मजबूरी क्या था गम। बता दिया होता अपने परिवार वालों से तो शायद हो जाता कम। रो रहा है …

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छोड़ो भाषा की भेद भाव

आज भी कितने लोग हैं जो भाषाओं पे लड़ते हैं उनसे मैं कहना चाहूं चाहे जिस भी भाषा में हो लोग तो आखिर बातें ही करते हैं। यूं तो बातें गूंगे भी समझ लेते हैं। लेकिन उनसे मैं क्या कहूं जो लोगों के बातें सुनने से पहले उसके भाषा पर हंस देते हैं। जो लोग …

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घर 🏡

घर वह है जहां की ईट पत्थर मेहनत के पैसे से जुड़ी हो, घर वह है जहां परिवार हर एक सदस्य से पूरी हो,घर वह है जहां हर काम भगवान के आशीर्वाद लिए बिना अधूरी हो, घर वह है जहां माता-पिता को सम्मान देना सबसे जरूरी हो, घर वह है जहां बच्चे बड़ों को पूजे …

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क्या हुआ हाथी विनायकी के साथ

जहा हाथी है राजकीय चिन्ह , वही है हाथी सुरक्षा बिन, जो घटना हुआ केरल में हाथी के साथ, उस पर हम करेंगे बात, उस हाथी का नाम था विनायकी, जो इंसानों के बीच दर्द से तड़प कर सांस छोड़ दिया किसी ने ना उसकी सहाय की। कुछ बदमाश लोगों ने बिनायकी को। खिलाया पटाखे …

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