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Neelam Kushwaha

मेरे इश्क़ पर सवाल हो गया-नीलम कुशवाहा

किसी के इश्क़ से हमें ऐतराज़ नहीं, और हमने दो – चार मुहब्बत की बातें क्या लिखी, तो सवाल हो गया | लोग एक को छोड़ दो-चार करते हैं, हमने एक पे मरना चाहा तो बवाल हो गया | लोग जिस्म के बाजार को इश्क़ इबादत समझते हैं, हमने इबादत को इश्क़ बना डाला तो, …

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शिक्षक-नीलम कुशवाह

शिक्षक एक ऐसा किरदार है, जो शिक्षा की कलम से शिष्य जीवन में नई रोशनी लाता है | शिक्षक एक ऐसा कर्णधार है, जो देश के भविष्य की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाता है | वह राष्ट्र निर्माणकर्ता है | उसके हाथों में है राष्ट्र का भविष्य, वह हर शिष्य के दुख को हरता है …

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अब के बरस-नीलम कुशवाहा

अब के बरस कान्हा, पास मेरे भी आ जाना | ये जन्मोत्सव अपना, संग मेरे भी मना जाना | तेरे नैन कटारी, बाण मुझपे चलाते हैं | सपनो में आके पिया, बहुत मुझे तड़पाते हैं | अब के बरस कान्हा, तड़प दिल की मिटा जाना | ये जन्मोत्सव …………….| दिन में अब चैन कहाँ, रात …

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अपना लो हमें भी-नीलम कुशवाहा

एक छोटी सी गुज़ारिश है, अपना लो न हमें भी | राधा, रुक्खमणि,मीरा न सही, पर कुछ तो बना लो न हमें भी | ख़्वाहिश नही है वाँसुरी बनकर तेरी होंठों से लिपटू, चाहत नही राधा बनकर तेरी बाहों में सिमटू, पॉव के घुंघरु न सही, पर पैरों के धुल बना लो हमें भी | …

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पुरुष समाज में स्त्री-नीलम कुशवाह

क दिन बहुत शान्त होकर बैठी थी मैं| तभी कोनों में अचानक से आवाज़ आई |एक लड़की और एक आदमी आपस में बात कर रहे थे |औरत धीरे से कुछ बोल रही थी और आदमी उसकी आवाज़ चिल्लाकर दबा दे रहा था | लड़की अपने एक सवाल का जबाब मांगती और आदमी उस लड़की के …

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रक्षाबन्धन का महत्व-नीलम कुशवाह

‘रक्षाबन्धन’ अपने आप में ही एक पूर्ण शब्द है न | अगर हम इसको डिवाइड करे तो इसमें दो शब्द है और दोनों के अर्थ अलग अलग | रक्षा + बन्धन अर्थात एक ऐसा बन्धन जो आपकी रक्षा करे | एक ऐसा वादा जो आपकी रक्षा किसी भी परिस्थिति में करने को अडिग रहे |रक्षाबन्धन …

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हो सके तो ऐ खुदा- नीलम कुशवाहा

जमाने से इतनी दूरियाँ बढ़ा दो, कि मुझको अकेले रहना सीखा दो | न किसी को पाने की चाहत हो, न किसी की जाने की आहट हो | हो सके तो ऐ खुदा, मुझको बस मुझसे मिला दो | कि बस अकेले…………..| न किसी के नफ़रत की फिक्र हो, न किसी के मुहब्बत की ज़िक्र …

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मन की प्रेम सगाई-नीलम कुशवाहा

एक दिन निकले हम अकेले सफर में, जा बैठे वहा जहा ऊपर आसमा निचे जमी थी | पड़ी नजर एक शख्स पे, जिसकी आँखो में अश्क और होंठो पे हँसी की कमी थी | कुछ पल एकटक होके देखते रहे हम उन्हें, फिर थोड़ा सहम कर हमने भी उनसे पूछ लिया | क्या हुआ है …

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भाई बहन का प्यार-नीलम कुशवाहा

भाई का बहन का प्यार, है युगो -युगो का विश्वास | इस रिश्ते में न कोई ऐब होता है, और न ही किसी के साथ फ़रेब होता है| ये रिश्ता अपने आप में इतना सच्चा होता है, कि हर रिश्ता इसके आगे कच्चा होता है | भाई – बहन में होता है हर रोज झगड़ा, …

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सच्चा देश प्रेम-नीलम कुशवाहा

लड़ना है तो सच के लिए लड़ो, नही रखा कुछ जातिवाद में | लड़ना है तो मानवता के लिए लड़ो, नही रखा कुछ धर्म-विविद में | सच्चा धर्म हमें धर्म के लिए लड़ना नही सिखाता, हम सब भारत माँ के बच्चे हैं, हमारा धर्म हमें यही बताता | हम हिन्दू, मुस्लिम नहीं सिर्फ हिन्दुस्तानी हैं, …

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माँ बाप का प्यार-नीलम कुशवाहा

कितनी खुबसुरत वो घड़ी होती है | जब बच्चा छोटा होता है तो, एक तरफ पिता और दूसरी तरफ माँ खड़ी होती है | जब बच्चा सोता है तो, उसकी हिफाज़त में माँ-बाप जागते है | जब बच्चा घुटनों से चलता है तो, पूरे दिन उसके पीछे भागते हैं | बच्चे के लड़खड़ाते कदम को, …

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हवा मस्तानी-नीलम कुशवाह

एक दिन बैठी थी मैं अकेली, न कोई साथी न कोई सहेली | तभी हवा के झोंके ने हल्के से मुझको छुआ, उसके छुअन से एक अलग सा एहसास हुआ | धीरे से पूछा मेरे कानो में क्यों खामोश है इतना, लगता है दर्द भरा है तुझमे सागर के गहराई जितना | मैं कुछ न …

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