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Tag: Neha Srivastava

हजार काँटों के बीच गुलाब है औरत-नेहा श्रीवास्तव

है पुरुष इमारत तो आधार है औरत , हजार काँटों के बीच गुलाब है औरत। सूरज के उगने से पहले जिसकी सुबह होती है, पी

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ठोकरों से दोस्ताना रहा-नेहा श्रीवास्तव

(1) पास समंदर था फिर भी एक बूँद को तरसें ।     प्यास बुझाने वाले पैमाने चलाने लगे हैं।।    खुदा, खुदा नही हम

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औरत की बेबसी, पुरुष की निगाह – नेहा श्रीवास्तव

सुना था औरत माँ,बहन,पत्नी,प्रेमिका,दोस्त होती है, पुरुष की गलत निगाह मे कुछ और होती है ! हालात इतनी गंभीर फिर से हो गयी है, समाज

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तुझे ढूंढ़ने निकलें या खुद को भूलाने निकलें – नेहा श्रीवास्तव

तुझे ढूंढने निकलें या खुद को भूलाने निकलें, तुझे भूलने के फिर से कई बहाने निकलें। अब हसरते नही हैं दिल मे कोई नई, मंजिल

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मेरी जरा सी भूल को लोग मुद्दा बना बैठें – नेहा श्रीवास्तव

हम सूरज को हाथों मे रख ,निकलते हैं रातों मे, जो कर दे मुझको रोशन ,वो बात नही हैं सितारो मे। मेरी जरा सी भूल

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बेटी,मै तुम्हे प्रेम के एक और बन्धन मे बाँध रहा हूँ – नेहा श्रीवास्तव

तुम्हारे चरित्र को अब मै क्या चरितार्थ करूँ। जो बीत गया हो, अब मै उसकी क्या बात करूँ।। बड़े नाजों से पाला है। फूलो सा

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जब दाग लगी हो नियत पर तो आईना भी क्या करे – नेहा श्रीवास्तव

जी रहे हम दिल-ए-खाली मकान लेकर क्या बतायें, कोई मुझे ढंग का किराएदार नही मिलता। लिख रही हूँ मै एक हर्फ़ आज आशिकों के नाम,

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मसले उलझ गयें मेरे बेबाक अन्दाज से – नेहा श्रीवास्तव

मैने रिश्तों का भ्रम पाल रखा था, अपने चारों तरफ उलझनो का जाल रखा था। मसले उलझ गये मेरी बेबाक अन्दाज से, इस हालात मे

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इश्क मे चेहरे बड़े सियासती होते हैं – नेहा श्रीवास्तव

दर्द महंगा है बिकता नही हम क्या करें । होश मे अब यहाँ कोई दिखता नही हम क्या करें।। मेरी खुली जुल्फों से भी कोई

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उस गरीब बच्चे के चेहरे पर मैने कई सवाल देखा है – नेहा श्रीवास्तव

मुकद्दर मे बदनसीबी , आँसूओं का सैलाब देखा है, उस गरीब बच्चे के चेहरे पर मैने कई सवाल देखा है। सूखी रोटी भी बँटती है

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भूख गरीब के पेट मे आग बनकर उठता है – नेहा श्रीवास्तव

आज गजल नही ,शेर नही ,कविता भी नही लिखपाऊँगी. जब भी भूख की तड़प लिखती हूँ लगता है मर जाऊँगी. पेट की आग मे अब

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दुश्मन भी मिला तो लाजवाब ही मिला – नेहा श्रीवास्तव

मत हिसाब कर की मुझको क्या मिला, जो भी मिला अपने आप से ही मिला। हम रिश्तो का भरम पाल रखे थे, रिश्ते मे मुझे

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