लेखकों का परिवार – नेहा श्रीवास्तव

लेखकों का परिवार – नेहा श्रीवास्तव

मेरे शब्दों को भी रहने का मकान मिल गया. नाम था गुमनाम पहचान मिल गया. कवियों और लेखकों का परिवार मिल गया. अपने भावनाओं को कोरे कागज पर शब्दों का रुप देती थी. कुछ इस तरह साहित्य लाइव का साथ मिल गया. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

रिश्ते मे मिलावट – नेहा श्रीवास्तव

मै जो हुँ बस वही हुँ , अपनी शख्सियत मे कोइ बनावट नही करती. चाहो तो आजमालो मुझे इक दफा फिर से ,मै रिश्तो मे कोई मिलावट नही करती. सलिके से माफ करने का हुनर जानती हुँ. सच कहुँ तो मै अपने दुश्मन से भी बगावत नही करती. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

हालात लिखती हुँ – नेहा श्रीवास्तव

मै कविता नही जज्बात लिखती हुँ. हर शख्स के दिल का हाल लिखती हुँ. गुजर रही हुँ जिससे वो हालात लिखती हुँ. जो जुबान न कह पाये वो भी बात लिखती हुँ. कौन कहता है मै अकेली हुँ. जो भी लिखती हुँ साहित्य लाइव के साथ लिखती हुँ. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

नेहा ने कुछ लिखा नही – नेहा श्रीवास्तव

काफी दिनो से नेहा ने कुछ लिखा नही , लगता है कोई नया जख्म उसको मिला नही. अपने सब अजनबी लगने लगे है, गैरो से मुझको कोई गिला नही. वो बात आज भी याद है मुझे इस बात का गम है, दर्द पुराना अब तक सिला नही. नेहा श्रीवास्तव

बिखरने नही दिया – नेहा श्रीवास्तव

जिन्दगी कि उल्झनो ने सम्भलने नही दिया, ख्वाहिसो ने मुझको मरने नही दिया. कुछ लोग चाहते थे देखना मुझको टूटा हुआ, पर मेरे खुदा ने मुझको बिखरने नही दिया. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश(बलिया)

मिलती हुँ – नेहा श्रीवास्तव

हर किसी से मुस्कुराकर मिलती हुँ, मत पूछिये कितने दर्द छुपाकर मिलती हुँ. कोई पढ ना ले मुझे मेरी नजरो से, हर शख्स से नजरे चुराकर मिलती हुँ. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

रंज रहेगा – नेहा श्रीवास्तव

देर से मिला भी तो क्या मिला, ये रंज रहेगा कि जिन्दगी कम है. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

बेअसर – नेहा श्रीवास्तव

मै बेखबर भी नही तेरी नजर मे भी नही, खूबसूरत नही पर इतनी बेअसर भी नही. जब थी मै कदर कर ना पाये मेरी, कोई मुझसा तुम्हारे शहर मे नही. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश(बलिया)

चाँद – नेहा श्रीवास्तव

चाँद को देखा हंगामा हो गया पुरी दुनिया को मुझपर निगरानी का बहाना हो गया. मेने प्रेम से क्या देखा मुसीबत हो गयी , हर रात मेरी गली मे उसका आना जाना हो गया. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश (बलिया)

शब्द – नेहा श्रीवास्तव

कुछ लिखुं तो बहुत कुछ कह जाते है मेरे शब्द . जिसे समझ मे आजाये उसे गहरा दे जाते है मेरे शब्द. हालात बुरे हुए तो मैने अपना शहर छोड़ दिया, आँखो मे नमी हो तो कोरे कागज पर उतर जाते है मेरे शब्द. हर मोड पर मैने खुद को अकेला पाया, तन्हाई मे बहुत
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