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Neha Srivastava

शायद उसे कोई मुझसा मिला भी हो – नेहा श्रीवास्तव

हर बार दिल टूटने का खत्म सिलसिला भी हो, अपने उसूलो पर जिन्दा रहें ऐसा फलसफा भी हो. खुशमिजाज सा वह शख्स दिख रहा है आजकल , शायद उसे कोई मुझसा मिला भी हो. मेरे आँखों मे कैद है निकल नही पाया , हो सकता है कोई रास्ता भूला भी हो. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश(बलिया)

जो कभी मेरे अपने हुआ करते थे – नेहा श्रीवास्तव

जो शहर कभी आबाद था , उसे बंजर देखा है . मैने निगाहों से भी तबाह होने का मंजर देखा है. बहुत दूर नही तुम्हारे आँखों मे समन्दर देखा है. कुछ अपनो से रुबरु हुयी और मै गुमनाम हो गयी, आग जलता हुआ कहीं और नही अपने अंदर देखा है . जो कभी मेरे अपने …

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पराजेय की हार – नेहा श्रीवास्तव

मै जीत गयी या हार गयी , वह पीड़ा हृदय के पार गयी. हर पथ पर मुझे उपहास मिला, खुद से खुद को धिक्कार मिला. जिन फूलों को स्पर्श किया , उनमे अनगिनत फार मिला. अब मै हो चुकी विकल, शतदल मे रहा न कोई कमल . क्यों करू मै जीत की आस , जब …

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भटका हुआ भटके से रास्ता पूछता है – नेहा श्रीवास्तव

वह शख्स मुझसे अपने मंजिल का पता पूछता है, एक भटका हुआ भटके से रास्ता पूछता है. गुनाह करता है खुद और सजा पूछता है, दर्द देता है मुझे और दवा पूछता है. हम कभी मिले तो नही शायद, “नेहा” तुमसे क्या है मेरा वास्ता पूछता है. नेहा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश(बलिया)

कुछ पुरानी तस्वीरें भी लगाया करो – नेहा श्रीवास्तव

नयी तस्वीरें शिकन बयां करती है , कुछ पुरानी तस्वीरें भी लगाया करो. दर्द का सिलसिला कम नही होगा , जीना है तो कभी मुस्कुराया भी करो. घर उदास सा लगता है तुम्हारा , घर को सजाया भी करो. चाय के बहाने ही सही कभी बुलाया भी करो. इतना भी खफा क्या होना जिन्दगी से …

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माँ बीमार है फिक्र नही प्रेमिका का इलाज fb पर – नेहा श्रीवास्तव

कुछ अनजान चेहरों के लिये अपनो को भूले जातेहैं , आधे से ज्यादा समय लोग fb पर बिताते हैं. अपने ही घर मे रहकर अपनो की खबर नही रहती है , कौन-कौन है online नजर इसी पर रहती है. क्या खायें क्या पीयें ये भी बातें fb पर , आज बहुत हैं थके हुये ये …

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इतने भूले हैं की हम मिले नही किसी को शायद – नेहा श्रीवास्तव

जमीन आसमान हो जाये तो बुरा क्या है , पत्थर भगवान हो जाये तो बुरा क्या है. अभी अभी हम मिले हैं शायद और पहचान हो जाये तो बुरा क्या है. अब कोई रहा ना मेरा करीबी , अपने मेहमान हो जाये तो बुरा क्या है घर मे लगता नही मेरा कोई अपना घर मकान …

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साहित्य लाइव एक ऐसा मंच रहा – नेहा श्रीवास्तव

साहित्य लाइव एक ऐसा मंच रहा, जहाँ हर शब्द स्वच्छन्द रहा . इतने कम समय मे कोई मंच कहाँ प्रगति कर पाया है , इससे जुड़ने वाला लेखक एक सुखद अनुभूति पाया है . हम लेखक थे गुमनाम हमको पहचान मिला. खुस्किस्मत है हम ,साहित्य लाइव पर ऐसा सम्मान मिला, कोशिश यही रहेगी इसे मुकाम …

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दाग जवानी मे भी लगता है – नेहा श्रीवास्तव

इरादा हो अटल तो आग पानी मे भी लगता है , जो संभलकर नही रहोगे तो दाग जवानी मे भी लगता है. कुछ लोग दुआ करते थे की मेरा गम सलामत रहे , और हम इरादा करते रहें की हम सलामत रहें. #शहर मे रौनक हुआ मेरे आने से , नजदीकियां खत्म हो जाती है …

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जिसे पा नही सकते वही अजीज होता है – नेहा श्रीवास्तव

जिसे पा नही सकते वही अजीज होता है, तकरार जिससे हो वही करीब होता है. तकदीर बदलने का कोई तरकीब बता मुझे, जो मिट नही सकता हाथो का ऐसा लकीर होता है. जिसके आगे धन दौलत की कोई कीमत नही होती , वही सच्चा फकीर होता है. बँदगी हद से ज्यादा हो तो खुदा रकीब …

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मै कविता लिखूं और तुम्हारा नाम हो जाये – नेहा श्रीवास्तव

अपना शहर अजनबी सा लगता है , आज तुम्हारे शहर मे जिन्दगी कि शाम हो जाये. मै कविता लिखूं , और तुम्हारा नाम हो जाये. एक अरसे से मै दर्द से गुजर रही हूँ, दवा कोई ऐसी मिले की आराम हो जाये. उम्मीद है जमीन आसमान हो जाये , मै पत्थर को छुऊ और वह …

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हम फिर से मरने की दुआ करते हैं – नेहा श्रीवास्तव

यादाश्त का अच्छा होना इतना भी अच्छा नही, कभी कभी कुछ बातों को भूलाने की भी दुआ करते हैं. जिन्दगी दर्द मे गुजरी है मेरी , हम मुस्कुराने की दुआ करते हैं. खुली किताब सी हो गयी है जिन्दगी, कुछ बातों को छुपाने की दुआ करते हैं. यूँ एक बार बिखरने मे मज़ा नही, तुम्हारे …

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