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Tag: poem

Hindi
नीतेश शाक्य अजनबी

अपना वतन मानव एक सामान है|

इस धरती को चूम के देखो निराली पहिचान है| अपनत्व की सदभावना, ख़ुशी हर इन्सान है| गंगा यमुना जैसी नदियाँ, सदियों की रफ़्तार है| खेत

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कविताएँ
Anand Sansaniwal

नाच रहा है मोर Poem By सचिन अ. पाण्डेय

नाच रहा है मोर हो गया है भोर, वर्षा हुई घनघोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| बयार चल रही चारों ओर, तृप्त

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कविताएँ
Anand Sansaniwal

दृष्टिदोष Poem BY प्रोo लक्षमीनारायण मंडल

दृष्टिदोष समझा नहीं किसी ने, समझेगा उस दिन जब मैं दुनियाँ छोर चला जाऊँगा ! खोजेगी दुनियाँ, पर मैं मिलूँगा नहीं !! देखते हैं लोग

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कविताएँ
Sachin Pandey

कलाम को मेरा सलाम Poem By Sachin A. Pandey

कलाम को मेरा सलाम हुआ था एक बुद्धि-सम्राट, कथा है जिसकी बहुत विराट; कभी न भाया जिसे आराम, उस कलाम को मेरा सलाम। हिंद को

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