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Tag: poonam sharma

ना कहने की हिम्मत रखती हूं-पूनम शर्मा

लड़की हूं पर बुलंद हौंसलें हैं मेरे, जो मुझे स्वीकार नहीं, उसे ना कहने की हिम्मत रखती हूं। हां! सच कहने की हिम्मत रखती हूं।

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इंसानियत का वजूद-पूनम शर्मा

अब थक चुके हैं रोज़ पढ़कर, रेप की कहानियां। कब तक चलेगा ये सिलसिला, कुछ वहशियों की मनमानियां। बेटियां वो फूल हैं, जो हर घर

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हर इक की बारी आती है- पूनम शर्मा

बेटे ने जो दर्द दिया, बूढ़ी आँखें उसे छिपाती है। उम्र के इस पढ़ाव में आकर, तन्हाई उन्हें डराती है। जिस बेटे के लिए, माँगी

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मना करेगी हर औरत-पूनम शर्मा

कैसा होगा वो दिन, जब मैं दुनिया में आऊंगी। मुझको सब प्यार करेंगें, लाडली मैं बन जाऊंगी। नन्ही-नन्ही उंगली पकड़कर, मुझको चलना सिखलाएंगें। गलत सही

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कलम भी रो पड़ी-पूनम शर्मा

आज मैंने कलम उठाई, इक कविता लिखने को। जैसे ही लिखा भूर्ण हत्या, मेरी कलम भी रो पड़ी।। मैंने पूछा क्या हुआ तुझको, बोली कि

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कौन से ताले में करे बंद-पूनम शर्मा

आज फिर इक और बेटी, शिकार हुई है। कुछ वहशी लोगों के हाथों, इंसानियत फिर शर्मसार हुई है। कितना रोई और चीखी होगी, नाजुक कली

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सारे फर्ज़ निभाऊंगी – पूणम शर्मा

जीने का हक दे दो मुझको, मैं भी दुनिया में आऊंगी। लेने दो खुली हवा में सांसें, बहुत कुछ करके दिखलाऊंगी। बांधों मत बेड़ियों में

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