एक दिन ऐसा आएगा… Poem By Pranay Kumar

एक दिन ऐसा आएगा… Poem By Pranay Kumar

एक दिन ऐसा आएगा… न कोई किसी के हँसी पर पावंदी लगाएगा न कोई किसी के ख़ुशी पर पावंदी लगाएगा जिंदगी होगी अपनी, सलीका होगा अपना, सोच होगी अपनी, रास्ता होगा अपना, एक दिन ऐसा आएगा… निकलेंगे सभी अपने काम पर, पहुंचेंगे किसी न किसी मुकाम पर, न लेंगे किसी का सहारा, न मानेंगे कभी
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ये दुनियाँ बड़ी जालिम है! Poem By Pranay Kumar

ये दुनियाँ बड़ी जालिम है! मन करता है कहीं भाग जाउँ मन कहता है कहीं रुक भी जाऊँ कोई परया अपना सा लगता है, कभी अपना पराया सा लगता है बड़े असमंजस में हूँ; किसके साथ रहूँ और किसे छोड़ जाऊँ? ये दुनियां बड़ी जालिम है! मन करता है कुछ बड़ा कर जाऊँ, मन कहता
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Udne do mujhe… Poem By Pranay Kumar

“उड़ने दो मुझे” भले ही रख लो डोर तुम अपने हाथ में, मगर उड़ने दो मुझे आकाश में. भले ही पता हो मेरा पाताल में, मगर घर हो मेरा आकाश में. भले ही हार हो जाए मेरी, मगर खेल लेने दो मुझे इस जहान में. भले ही थक गया हूँ मैं, मगर चल लेने दो,
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