प्यार का मीठा मीठा दर्द – रवि कान्त अगरवाल

प्यार का मीठा मीठा दर्द – रवि कान्त अगरवाल

प्यार का मीठा मीठा दर्द दोस्तों ये प्यार की कहानी बिलकुल सच है इसे पढ़कर आप भी अपने निजी जीवन को इससे सम्बंधित पाओगे | ये कहानी एक उस लड़के की है जो किसी लड़की को दिल और जान से चाहता है, लेकिन सिर्फ इस बात के लिए लड़के को ठुकरा दिया जाता है की
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ये कैसी राजनीति – रविकांत अग्रवाल

गांधीजी का चश्मा तोडा , जनता से तूने मुंह मोड़ा , आम्बेडकर की मूर्ति गिराई , तूने अपनी ओकात दिखाई | एक चाय की प्याली पर तूने वतन को बेच डाला , झूठे वादे करके जनता को जखम दे डाला | इसको तेरी गद्दारी कहू , या कहू तेरी लाचारी कैसी तेरी 56 इंची दमदारी
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मारवाड़ी कविता – रविकांत अग्रवाल

अर , इस देश म चारू मेर क्याकि टाय – टाय हो री ह , अर ,इस देश की या जनता, क्यूकर हाय – हाय रो री ह | जद तो इस जनता न , व् जुमला भाया भोत गरमा गरम पकोड़ा , चाय क साथ खाया भोत | इब क्यूकर जनता की , सोड
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मेरे भारत के जवान की आत्मकथा – रविकांत अग्रवाल

एक सैनिक का जीवन :- निचे तपती धरती , ऊपर नीला आसमान बिच सरहद पर खड़ा हिन्दुस्तानी जवान | जिसके हाथ में तिरेंगे का सम्मान , वो तिरंगा ही जिसका , परिवार और भगवान् | सैनिको पर राजनैतिक अत्याचार :_ क्यों राजनीती के नाम पर उनको बांटा जाता है , क्यों धर्म के नाम पर
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पिता क्या है – रविकांत अग्रवाल

दोस्तों ! मां पर बहुत सी कविताएं व लेख/पढ़े लिखे जाते है , पर पिता के लिए बहुत कम पढ़े जाते है | पिता के लिए कुछ पंक्तिया :- पिता है तो रोटी है , कपडे है, मकान है | पिता नन्हे से परिंदे का , बड़ा सा आसमां है || पिता है तो घर
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मुस्लिम धर्म की अच्छाई पर एक तर्क – रविकांत अग्रवाल

स्लिम धर्म की अच्छाई पर एक तर्क पुराने समय की बात है | एक बार नबी आज़ाद अपने कुछ साथियो के साथ दुर्गम रास्ते से जा रहे थे | तभी एक पत्थर उनके पैर पर लगा , तो उन्होंने पत्थर को तुरंत उठाकर एक तरफ फेक दिया | और अपने साथियों से कहा की रास्ते
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ईमेल आईडी और सफलता – रविकांत अग्रवाल

बात आधुनिक युग की है जब सरकारी नौकरी का वर्चस्व अपने चरम पर था | एक गरीब-सा व्यक्ति अखबार में विज्ञापन पढ़कर एक चपरासी के पद के लिए इंटरव्यू देने गया , उसने सभी सवालो के सही जवाब दिए लकिन जब अंत में उससे पूछा गया कि अपनी ईमेल आईडी बताइए | तो उस व्यक्ति
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समस्या व समाधान – रविकांत अग्रवाल

एक समय की बात है | एक राज्य के राजा ने खुबसूरत महल का बड़ा सा दरवाजा बनवाया और दरवाजे के बहार गणित का एक सूत्र लिखवाया तथा सभी राज्यों में घोषणा करवाई की ये दरवाजा केवल सूत्र का हल करने से हे खुलेगा | जो इस दरवाजे को खोल देगा , महल का मालिक
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होली का त्यौहार – रविकांत अग्रवाल

होली के रंगों की चुनर , ओढेगी दुनिया सारी रंग, गुलाल, अबीर की , हो रही पुरजोर तैयारी | लेकिन इस बार होली को , कुछ ख़ास अंदाज़ में मनाएंगे प्रेम और भाईचारे का पाठ , सबको पदायेंगे | देता हु सन्देश सबको, सब रंजिशे मिटा देना आपसी द्वेष को तुम, होली की अग्नि पर
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साहित्य लाइव पत्रिका – रविकांत अग्रवाल

आधुनिक युग जो की पूरी तरह तकनीक का दौर है |जिसमे लोगो के पास समय का अभाव है लकिन शुविधाये भरपूर है , उसी प्रक्रिया में दिशा लाइव ग्रुप के हिंदी काव्य / पाठ मंच साहित्य लाइव का पाक्षिक पत्रिका ( लाइव ) का कदम सराहनीय है | जिससे देश भर के हिंदी में रूचि
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