सिगरेट एक जहर – रवि कान्त अगृवाल

सिगरेट एक जहर – रवि कान्त अगृवाल

दोस्तों आज सुनाता हुं मै आपको आपबीती जो शायद हर सिगरेट पीने वाले पर बीती सिगरेट हैं एक ऐसा जहर जो धीरे धारे दिखाता है अपना कहर जितना रहेंगें इससे दूर बना रहेगा चेहरे का नूर ये अपनी खुशियों को जीवन से हटा देता हैं और उमृ के पलो को घटा देता हैं अाओं इसका
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राजनीति एक खेल – रवि कान्त अगृवाल

राजनीति एक ऐसा दलदल है जिसमे फसां युवाओं का कल है।। ये हैं एक ऐसा गन्दा खेल जिसमे हो रहा भविष्य फेल एक दुसरे की इज्जत से ये खेला जाता हैं देश की इज्जत को इसमे धकेला जाता हैं निवेदन हैं आप सभी से अपने हौसले बुलंद करो, ताकि राजनेताओं को कह सके कि ये
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भाग दौड भरी जिन्दगी – रवि कान्त अगृवाल

सुबह जल्दी उठकर देर रात सोना दिन भर कुछ पाना कुछ खोना कभी रब की इबादत कभी खुदा की बन्दगी यहीं हैं भाग दौड भरी जिन्दगी पुरे दिन काम मे रहना थककर ना किसी से कुछ कहना अपनों से की बेवफाई तो परायों से कर ली दिल्लगी यहीं है भाग दौड भरी जिन्दगी रवि कान्त
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जिन्दगी का त्यौहार – रवि कान्त अगृवाल

मां की ममता,पिता का प्यार भाई की डांट,बहन का दुलार यहीं तो है जिन्दगी का त्यौहार बात बात पर बहन से लडना बेमतलब के लफडो मे पडना फिर खाई मम्मी की मार यहीं तो है जिन्दगी का त्यौहार हर बात पर रौब दिखाना ना किसी चीज का ठिकाना फंस जाने पर बन जाना मासूम और
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आम आदमी की व्यथा – रवि कान्त अगृवाल

जो भी कहुंगा सच ही, नए साल की कसम ताजा बना दामाद हुं , ससुराल की कसम महंगाई का मारा हुं , रोटी दाल की कसम मैं आम आदमी हुं , केजरीवाल की कसम रवि कान्त अगृवाल पुणे

मै फिर से बच्चा होना चाहता हुं – रवि कान्त अगृवाल

एक बार फिर से सिमट कर मां की गोद मे सोना चाहता हुं अपने आप को मां की बाहों मे खोना चाहता हुं थक गया हुं लोगो के बदलते चेहरे देखकर इसलिये एक बार फिर से बच्चा होना चाहता हुं ।।। थक गया हुं भाग भाग कर, रातो मे जाग जाग कर एक बार बिना
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56 इंच का सीना – रवि कान्त अगृवाल

आखों मे एक नया रूआब चढ ही जाता हैं इतिहास मे नया मुकाम गढ ही जाता हैं शादी के बाद अगर बीबी साथ ना रहे सीने का नाप इंच इंच बढ ही जाता हैं।। रवि कान्त अगृवाल ( पुणे )

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