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Rahul Red

दो वक्त की रोटी – राहुल रेड

झेला जिसने सूखा सावन झेला आँधी और तूफ़ान पानी से सस्ता श्रम जिसका वो कहलाता है किसान वस चले उसका तो तूफानों की राह मुड़ा देता अपने खून पसीने से धरती की प्यास बुझा देता उम्र गुजर जाती है जिनकी खेतों में पहन लंगोटी आज उनको हो गयी मुश्किल दो वक्त की रोटी। जिसकी मेहनत …

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जीवन की आधी रेस पार हो गया हूँ मैं – राहुल रेड

जीवन की आधी रेस पार हो गया हूँ मैं घर पर बैठे बैठे बेकार हो गया हूँ मैं लतीफे सुनकर भी हँसी नहीं आती है आजकल कितना बेजार हो गया हूँ मैं कितने दिनों से कोई गजल न लिखी बीमारों के साथ रह बीमार हो गया हूँ मैं कभी अच्छा तो कभी बुरा बन जाता …

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ये फालतू वक्त मुझसे काटा नही जाता – राहुल रेड

हमारे खून पसीने से कमाई हुई रकम आप औरों में बाँटने की बात करते हो ये फालतू वक्त मुझसे काटा नही जाता आप जिंदगी काटने की बात करते हो राहुल रेड फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश

वादा करके मुझसे निभाया नहीं जाता – राहुल रेड

जीवन की आधी रेस पार हो गया हूँ मैं घर पर बैठे बैठे बेकार हो गया हूँ मैं लतीफे सुनकर भी हँसी नहीं आती अब आजकल कितना बेजार हो गया हूँ मैं कितने दिनों से कोई गजल न लिखी बीमारों के साथ रह बीमार हो गया हूँ मैं कभी अच्छा तो कभी बुरा बन जाता …

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शिकायत तुमसे तुम्हारी क्यों करें हम – राहुल रेड

शिकायत तुमसे तुम्हारी क्यों करें हम दुश्मन से दोस्ती यारी क्यों करें हम हर बार जब उसी से हमे धोखा मिला फिर उसकी तरफदारी क्यों करें हम जितनी जरूरत है उतनी ही ठीक है हद से ज्यादा जेब भारी क्यों करें हम पता है हमे नौकरी मिलने वाली नहीं तो उसके लिए मारामारी क्यों करें …

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जातिवाद की जड़ – राहुल रेड

न ख़त्म होगा आरक्षण, ना मिटेगा जातिवाद न जाति बन्धन तोड़ ब्राह्मण होगा दलित साथ जातिवाद की आग में आरक्षण घी जैसा है फायदा वही लोग उठाते जिनके पास पैसा है जहर जातिवाद का तुम ही निचोड़ सकते हो मानवता को समानता से तुम ही जोड़ सकते हो बहती हुई धारा को अगर चाहते हो …

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मुफ़लिस की लाचारी कौन देखता है – राहुल रेड

मुफ़लिस की लाचारी कौन देखता है कौन किस पर भारी कौन देखता है कहाँ से कहाँ तक विज्ञान की वजह से पहुँची दुनियाँ सारी कौन देखता है सपनो को मारकर बेबस मजदूर ने जिंदगी कैसे गुजारी कौन देखता है जनता ने जिन्हें सिंहासन सौंप दिया उनसे जनता हारी कौन देखता है नेता की खाँसी तक …

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सत्ता भी कभी जनता की सगी हुई – राहुल रेड

सत्ता भी कभी जनता की सगी हुई है भारत की जनता पहले से ठगी हुई है पाप का अंदाज इस बात से लगा लो गंगा नहाने के लिए लाईन लगी हुई है राहुल रेड फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश

अब तो मन्दिर में भी बलात्कार होने लगे – राहुल रेड

नफरत का बीज हम इस कदर बोन लगे दरिंदगी अपनाकर ​इंसानियत ​ खोने लगे कैसे जायेगी वो हिफाजत की दुआ करने अब तो मन्दिर में भी बलात्कार होने लगे राहुल रेड फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश

इन्शानो पर शुरुआत से जुल्म इन्शान ने ढाया है – राहुल रेड

इन्शानो पर शुरुआत से जुल्म इन्शान ने ढाया है अपनों ने अक्सर यहाँ अपनों से धोखा खाया है मसरूफियत भरी जिंदगी में वक्त की भरमार है ये बात अलग है हर कोई बेवक्त मिलने आया है राहुल रेड फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश

शान्ति भी है थोडा आक्रोश भी है, क्रांति भी है मुझमे संतोष भी है – राहुल रेड

शांति भी है थोडा आक्रोश भी है क्रांति भी है मुझमे सन्तोष भी है धूप से छाँव का सफर शहर से गाँव का सफर कहा ज़माने ने है बुझदिल ढूँढता फिर भी मैं मंजिल खाकर जमाने की ठोंकरे फिर भी आज होश भी है शांति भी है थोडा आक्रोश भी है क्रांति भी है मुझमे …

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मैं रोज हारता हूँ, रोज जीतता हूँ – राहुल रेड

Turn off for: Hindi मैं रोज हारता हूँ, रोज जीतता हूँ गिरता हूँ, चोट लगती है उँगलियाँ टूटती हैं, फ्रैक्चर होते हैं खून निकलता है, दर्द होता है लेकिन खेलना बंद नही करता मेरे लिए हार जीत कोई मायने नहीं रखती मायने रखता है खेल के प्रति लगाव जिस वजह से शर्दी, धूप, दर्द, चोट …

मैं रोज हारता हूँ, रोज जीतता हूँ – राहुल रेड Read More »

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