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Tag: Rohitash Singh

किसान हमारा सस्ता है-रोहिताश सिंह

जय जवान, जय किसान । का नारा अब ये डसता है। खोखली सरकारों के वादों में, अन्नदाता तिल तिल मरता है, किसान हमारा सस्ता है।

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हाय कैसी नादानी-रोहिताश सिंह

कुछ भी करने से पहले, करली अपनी मनमानी , हाय कैसी नादानी, वक़्त चला रेत सा, हाथो से फिसले फिसले, हमने कीमत नहीं जानी, करली

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तोड़ दे इन बंदिशों को-रोहिताश सिंह

तोड़ दे इन बंदिसो, तू एक सवेरा नया, किरणों से अपनी कर प्रभात, अंधेरों को देकर के मात, तू उजाला एक नई छवि का, प्रकाशमान

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हज़ारों शिकायते-रोहिताश सिंह

अंजान भी हो, परेशान भी हो, नादान भी हो, हैरान भी हो, होगी तुम्हारी उस रब से हज़ारों शिकायते, वो करे सबकी शिकायते कुबूल जरूरी

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शीर्ष की पुकार-रोहिताश सिंह

हो प्रयास, निरंतर प्रयास, पाना है तो , पाकर रहेंगे यह वक्त की गुहार है, ये शीर्ष की पुकार है, ये शीर्ष की पुकार है।

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कुछ और चाहिए- रोहिताश सिंह

हमे अपनी जरूरतों का ना मिटने वाला छोर चाहिए। कुछ और चाहिए,कुछ और चाहिए। देखे जहा भी जाये जहाँ भी, हमे अपनी प्रसिद्धि का शोर

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आज गगरी की सरिता-रोहिताश सिंह

आज गगरी की सरिता चित चकोरी,हर्ष, प्रीत,प्रताप,प्रणब, प्रभा,से प्रेमता यह पूछ रही, कर,सृजन,प्रेमपात,के,पथ, में,राधिके,नयन,कमल, से,कृष्ण को है झाँक रही,हे मेरे वृन्दन,के,वासी,कर, वरण,तेरे,चरण की,आलिपाये, नितसोम,रस,कंदर्प धो

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