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Sachin A. Pandey

तू ही है मौला , तू ही खुदा ! – सचिन अ पांडेय

तू ही है मौला,तू ही खुदा;कहाँ हुआ तू यों गुमशुदा। नैन देखे न दिखे तेरी सूरत,नूर और सादगी की है तू एक मूरत।। तू मिला तो रब मिला,जिंदगी ठहरी मुश्किलात-ए-सिलसिला। तू है तो हूँ मैं काबिल।तू न हो तो नहीं कुछ हासिल।। सचिन अ पांडेय मुंबई,महाराष्ट्र

रूठ जाने-सा लगता है ! – सचिन अ. पाण्डेय

अब किसी का पलभर भी गुफ्तगू न करना उसके रूठ जाने-सा लगता है !! किसी की बेशुमार हसरत रखना अब तो दिल को टूट जाने-सा लगता है !! ज़िंदगी के इस सफ़र में कोई हमसफ़र माँगू तो दामन उसका छूट जाने-सा लगता है !! उसके विरह में चंद लम्हें भी जीऊँ तो अब ये दम …

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एक पगली अनजानी-सी – सचिन अ॰ पाण्डेय

कॉलेज का वो पहला दिन,एक पल को आँखें चार हुईं, थे अनजाने एक-दूजे से वो,फिर अनचाही तक्रार हुई, वो एक पगली अनजानी-सी,जो प्यार उसीसे करती थी, थी दिल की कमज़ोर बहुत वो,इज़हार करने से डरती थी I कॉलेज उसका न आना,एक दिन भी न उसको गवारा था, उसकी नज़रों में वो सारे जहाँ से भी …

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अब की बार होली में – सचिन अ. पाण्डेय

उल्हासपूर्ण सतरंग सहित, भिगो देंगे सभी को रोली में, अब की बार होली में ! आमादप्रमोद के दृश्य दिखेंगे , चहु ओर सभी की खोली में, अब की बार होली में ! उत्साह एवं ललकारभरी अब, ध्वनि गूँजे सभी की बोली में, अब की बार होली में ! परसेवा,परप्रेम,परहित, संदेसा यही दे हर एक गीत, …

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बेटियाँ नसीब कहाँ होती हैं – सचिन अ॰ पाण्डेय

सभी के मुकद्दर में बेटियाँ नसीब कहाँ होती हैं ? रब के असीम रहमोकरम जिस घर-आँगन पर हों , बेटियाँ तो सिर्फ वहाँ होती हैं । सचिन अ॰ पाण्डेय

अब तुम जो हो – सचिन अ॰ पाण्डेय

अब तुम जो हो, तभी नूर-ए-वफा की बात कहते हैं ! तुम्हारे लबों से बयाँ हुए हर लफ़्ज़ पर इरशाद कहते हैं !! इस हरफ़नमौला को कहाँ फिक्र इस जमाने की ? हम तो तुम्हें ही मुकद्दर, तुम्ही को मुराद-ए-हयात कहते हैं सचिन अ॰ पाण्डेय मुंबई,महाराष्ट्र

आग के दरिया-सा दहकना छोड़ देता ये दिल – सचिन अ. पाण्डेय

काश इस कदर न आँखें मिलाई होती मुझसे एक रोज, तो तेरे पलभर के दीदार को तरसना छोड़ देता ये दिल ! काश न तेरे प्यार की खुशबू आई होती मेरी ओर, तो खिली हुई बगिया-सा महकना छोड़ देता ये दिल !! काश न यूँ तेरी बातों का असर छाया होता मुझपर, तो तेरे हर …

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ऐ मेरी हुस्न-ए-मल्लिका, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे ! – सचिन अ॰ पाण्डेय

ऐ मेरी हुस्न-ए-मल्लिका, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे, हसीन तो मिलते हैं कई राह-ए-ज़िंदगी में,मगर तुझे ही चाहूँ उम्रभर मैं, ऐसा मुझे कोई पैगाम दे दे !! हर दिन हो होली और हर रात दिवाली हो, यूँ मेरे दामन में तू अपनी सुबहो-शाम दे दे !! गुमनाम हो जाऊँ तेरी दीवानगी में एक …

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तुम हमसे दूर हो, हमारी यादों से नहीं ! – सचिन अ॰ पाण्डेय

तुम हमसे दूर हो, हमारी यादों से नहीं ! खेल सकती हो ज़िंदगी से, हमारे जज़्बातों से नहीं !! रुख न करो दिन में मगर रूठो यूँ बहारों भरी रातों से नहीं ! कत्ल कर दो इस जिस्म का मगर कभी दूर होना यूँ रूहानी-साँसों से नहीं !! सचिन अ॰ पाण्डेय

मौसम बड़ा बेईमान! – सचिन अ. पाण्डेय

हर्षित हुआ राष्ट्र का किसान, जो है देश का अभिमान; है ऋतुओं की शान, मौसम बड़ा बेईमान। ग्रीष्म से मुक्त कराता लाया जान-में-जान, जल से भरे बगीचे-रान; खुशियाँ है जीत समान, मौसम बड़ा बेईमान। नाचे बाल-बालाएँ उठाए सीना तान, जैसे हो कोई कीर्तिमान; हरियाली से बढ़ा पर्यावरण का मान, मौसम बड़ा बेईमान। आनंदभोर सभी जीव-जान, …

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शायरी – सचिन अ॰ पाण्डेय

जीता था खुदी के लिए यह नाचीज़, तेरे दीदार ने सीखा दिया आशिकी पर जान निसार करना ! इस बंदे को तो पूरी दुनिया मालूमात थी दगाबाज फ़रेबी, तुझी से सीखा है लोगों पर एतबार करना !! खौफ था इसे किसी से दो अल्फ़ाज़ भी कहने में, तूने सीखा दिया इसे मोहब्बत-ए-इज़हार करना !!! -सचिन …

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