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Tag: Sachin A. Pandey

तू ही है मौला , तू ही खुदा ! – सचिन अ पांडेय

तू ही है मौला,तू ही खुदा;कहाँ हुआ तू यों गुमशुदा। नैन देखे न दिखे तेरी सूरत,नूर और सादगी की है तू एक मूरत।। तू मिला

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रूठ जाने-सा लगता है ! – सचिन अ. पाण्डेय

अब किसी का पलभर भी गुफ्तगू न करना उसके रूठ जाने-सा लगता है !! किसी की बेशुमार हसरत रखना अब तो दिल को टूट जाने-सा

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एक पगली अनजानी-सी – सचिन अ॰ पाण्डेय

कॉलेज का वो पहला दिन,एक पल को आँखें चार हुईं, थे अनजाने एक-दूजे से वो,फिर अनचाही तक्रार हुई, वो एक पगली अनजानी-सी,जो प्यार उसीसे करती

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अब की बार होली में – सचिन अ. पाण्डेय

उल्हासपूर्ण सतरंग सहित, भिगो देंगे सभी को रोली में, अब की बार होली में ! आमादप्रमोद के दृश्य दिखेंगे , चहु ओर सभी की खोली

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बेटियाँ नसीब कहाँ होती हैं – सचिन अ॰ पाण्डेय

सभी के मुकद्दर में बेटियाँ नसीब कहाँ होती हैं ? रब के असीम रहमोकरम जिस घर-आँगन पर हों , बेटियाँ तो सिर्फ वहाँ होती हैं

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आग के दरिया-सा दहकना छोड़ देता ये दिल – सचिन अ. पाण्डेय

काश इस कदर न आँखें मिलाई होती मुझसे एक रोज, तो तेरे पलभर के दीदार को तरसना छोड़ देता ये दिल ! काश न तेरे

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ऐ मेरी हुस्न-ए-मल्लिका, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे ! – सचिन अ॰ पाण्डेय

ऐ मेरी हुस्न-ए-मल्लिका, मुझे तू उल्फ़त का जाम दे दे, हसीन तो मिलते हैं कई राह-ए-ज़िंदगी में,मगर तुझे ही चाहूँ उम्रभर मैं, ऐसा मुझे कोई

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तुम हमसे दूर हो, हमारी यादों से नहीं ! – सचिन अ॰ पाण्डेय

तुम हमसे दूर हो, हमारी यादों से नहीं ! खेल सकती हो ज़िंदगी से, हमारे जज़्बातों से नहीं !! रुख न करो दिन में मगर

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हबीब नसीब न हो ! – सचिन अ॰ पाण्डेय

वो आशिकी ही कैसी, जिसमें दिल-नशीं दिलबर करीब न हो ! और वो खुशनसीबी ही कैसी, जिसमें हबीब नसीब न हो !! -सचिन अ॰ पाण्डेय

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मौसम बड़ा बेईमान! – सचिन अ. पाण्डेय

हर्षित हुआ राष्ट्र का किसान, जो है देश का अभिमान; है ऋतुओं की शान, मौसम बड़ा बेईमान। ग्रीष्म से मुक्त कराता लाया जान-में-जान, जल से

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