मेरा देश बदल रहा है – शुभम् लांबा

मेरा देश बदल रहा है – शुभम् लांबा

अच्छे दिनों का सपना दिखाकर, नेता देश को लूट रहा है। आजकल इंसान संस्कार भुला कर, रिश्तों से छूंट रहा है। हो सकता है हो रहा हो विकास देश का, लेकिन इंसानियत का वजूद मिट रहा है। आर्थिक दर का तो हिसाब नहीं कोई, लेकिन साम्प्रदायिकता का दौर बड़ रहा है। क्या होगा उस देश
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माँ मैं तेरे घर का चिराग हूँ – शुभम लांबा

तुने नौ मास गर्भ में रखा, फिर जन्म दिया है मुझे, तेरे आंचल की छांव ने सम्भाला है मुझे, तेरे आंगन की मिट्टी ने पाला है मुझे। इसीलिए तो मैं तेरा शुक्रगुजार हूँ। माँ मैं तेरे घर का चिराग हूँ। माँ तेरे दूध के कर्ज को चुकाना है मुझे, और तेरी कोख की पीड़ा का
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दोस्त मैं बदल गया हूँ – शुभम् लांबा

मैं तेरे लिए अपने जज़्बात नहीं, सिर्फ रास्तें बदल गया हूँ। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तू उन रास्तों से गुजरें जिन रास्तों से मैं गुज़रा गया हूँ। हाँ दोस्त मैं बदल गया हूँ। माना कि मेरा वक़्त ख़राब है, लेकिन मेरे फैसले नहीं, हो सकता है मेरी परिस्थिति खराब हो , लेकिन मेरा व्यक्तित्व
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तुम सिर्फ – शुभम् लांबा

तुम सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि जिंदगी हो मेरी। तुम सिर्फ दिल नहीं, बल्कि धड़कन हो मेरी। तुम सिर्फ जिस्म नहीं, बल्कि आत्मा हो मेरी। तुम सिर्फ आवाज नहीं, बल्कि पहचान हो मेरी। तुम सिर्फ वक़्त नहीं, बल्कि एक सदी हो मेरी। तुम सिर्फ होंसला नहीं, बल्कि ताकत हो मेरी। तुम सिर्फ ख्वाइश नहीं, बल्कि ज़िद
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माँ तेरे हाथों की रोटियां – शुभम् लांबा

माँ तेरे हाथों से बनीं रोटियां ही भुख मिटाती हैं, खुद के हाथ से बनीं रोटियां तो सिर्फ पेट भरती हैं। तेरे फुल्के की खूशबू घर जल्दी आने का बुलावा देती है, और तेरे हाथ से बनीं दाल रोटी भी five Star का खाना भी फिका़ कर देती है। तेरे साथ खाना खाना अंतर आत्मा
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पापा का बेटा – शुभम् लांबा

पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है। और जिम्मेदारियां निभाना मैंने आपसे ही सिखा है। शायद निर्णय लेने की समझ नहीं है मुझे, लेकिन रास्तें चुनना मैंने आपसे ही सिखा है। पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।   दुसरों की परेशानियां कंधों पर उठाना मैंने आपसे ही सिखा
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शायरी – शुभम् लांबा

ऐ ख़ुदा उस बेवफा को मेरी जिंदगी से गुमनाम करदे। लेकिन एक दुआ है मेरी उसकी जिंदगी वफाओं से भर दे। #शुभम् लांबा 0

शायरी – शुभम् लांबा

माँ तेरे आशिषों ने ही जिन्दा रखा है मुझे, दुनिया के खूलूस ने तो कब का मार दिया होता मुझे। ‌‌‌ शुभम् लांबा 0

शायरी – शुभम् लांबा

तुझे तेरे वक़्त पर गुमान है, मुझे मेरे वक़्त का इंतजार है। लेकिन ये नासमझ दिल चाहता है, कि तेरा गुमान कभी ना टूटे, और मेरा सायां वक़्त से ना छूटे। #शुभम् लांबा 0

शायरी – शुभम् लांबा

सच कहूं तो जिंदगी ऐसे मुकाम पर है, लगता है, कहानी खत्म होने वाली है, और तुम मेरी आखरी मोहब्बत हो। #शुभम् लांबा 0

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