तुम सिर्फ – शुभम् लांबा

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तुम सिर्फ – शुभम् लांबा

तुम सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि जिंदगी हो मेरी। तुम सिर्फ दिल नहीं, बल्कि धड़कन हो मेरी। तुम सिर्फ जिस्म नहीं, बल्कि आत्मा हो मेरी। तुम सिर्फ आवाज नहीं, बल्कि पहचान हो मेरी। तुम सिर्फ वक़्त नहीं, बल्कि एक सदी हो मेरी। तुम सिर्फ होंसला नहीं, बल्कि ताकत हो मेरी। तुम सिर्फ ख्वाइश नहीं, बल्कि ज़िद
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माँ तेरे हाथों की रोटियां – शुभम् लांबा

माँ तेरे हाथों से बनीं रोटियां ही भुख मिटाती हैं, खुद के हाथ से बनीं रोटियां तो सिर्फ पेट भरती हैं। तेरे फुल्के की खूशबू घर जल्दी आने का बुलावा देती है, और तेरे हाथ से बनीं दाल रोटी भी five Star का खाना भी फिका़ कर देती है। तेरे साथ खाना खाना अंतर आत्मा
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पापा का बेटा – शुभम् लांबा

पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है। और जिम्मेदारियां निभाना मैंने आपसे ही सिखा है। शायद निर्णय लेने की समझ नहीं है मुझे, लेकिन रास्तें चुनना मैंने आपसे ही सिखा है। पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।   दुसरों की परेशानियां कंधों पर उठाना मैंने आपसे ही सिखा
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शायरी – शुभम् लांबा

ऐ ख़ुदा उस बेवफा को मेरी जिंदगी से गुमनाम करदे। लेकिन एक दुआ है मेरी उसकी जिंदगी वफाओं से भर दे। #शुभम् लांबा 0

शायरी – शुभम् लांबा

माँ तेरे आशिषों ने ही जिन्दा रखा है मुझे, दुनिया के खूलूस ने तो कब का मार दिया होता मुझे। ‌‌‌ शुभम् लांबा 0 साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात
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शायरी – शुभम् लांबा

तुझे तेरे वक़्त पर गुमान है, मुझे मेरे वक़्त का इंतजार है। लेकिन ये नासमझ दिल चाहता है, कि तेरा गुमान कभी ना टूटे, और मेरा सायां वक़्त से ना छूटे। #शुभम् लांबा 0 Get Website for Your Business, we’re here for you! DishaLive Web Design & Solutions

शायरी – शुभम् लांबा

सच कहूं तो जिंदगी ऐसे मुकाम पर है, लगता है, कहानी खत्म होने वाली है, और तुम मेरी आखरी मोहब्बत हो। #शुभम् लांबा 0 Get Website for Your Business, we’re here for you! DishaLive Web Design & Solutions

शायरी – शुभम् लांबा

तेरे हुस्न को चाहने वाले लाखों होंगे, पर तेरी रूह की चाहत सिर्फ मुझे है। शुभम् लांबा 0 साहित्य लाइव रंगमंच 2018 :: राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता • पहला पुरस्कार: 5100 रुपए राशि • दूसरा पुरस्कार: 2100 रुपए राशि • तीसरा पुरस्कार: 1100 रुपए राशि & अगले सात प्रतिभागियों को 501/- रुपये प्रति व्यक्ति

तुझमें समा जाऊं- शुभम् लांबा

जब तुम हो पास मेरे, मैं क्यूं न हद से गुजर जाऊँ। जिस्म बना लूँ मैं तुम्हें, या‌‌ रूह मैं तुम्हारी बन जाऊँ। तु कहे अगर इक बार मुझे, मैं खुद ही तुझमें समा जाऊँ। लबों से छूँ लूँ जिस्म तुम्हारा, सांसों में सांसें जगा जाऊँ। अपनी जिंदगी बना लूँ मैं तुम्हें, और मरने की
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आरज़ू – शुभम् लांबा

सच कहूं तो, तेरे जिस्म पर लिबाज़ अच्छा लगता है, पर तेरी रूह पर नहीं, तेरे हुस्न पर पर्दा अच्छा लगता है, पर तेरे दिल पर नहीं। तेरे लबों पर सिर्फ मेरा नाम अच्छा लगता है, पर किसी और का नहीं। तेरे इश्क का इजहार अच्छा लगता है, पर तेरी जुदाई का ख्याल नहीं। तेरे
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