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Than Singh Meena

तस्वीर – थानसिंह”तराना”

आज कहानी कुछ ऐसी है मेरे भारत देश की, नेताओं ने तस्वीर बदलदी मेरे भारत देश की। मौसम नही सुहाना कोई चारों तरफ खिजायें हैं, हवा बसंती गयी कहाँ अब मेरे भारत देश की। बैसाखी का पर्व नही अब हमको अच्छा लगता, महंगाई में फसलें खो गयी अब मेरे भारत देश की। नई-नई जो बनी …

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हिंदी की हिंदी – थान सिंह तराना

सारे देश ने माना जिसको अब उसका सम्मान नहीं, लागू किया था एक दिन जिसको अब वो कहीं फरमान नहीं। दीवारों पर लिखा मिलेगा क्यों न इस पर गर्व करें, अधिकार मिला है हर जन को फिर इस पर क्यों शर्म करें शुद्ध अगर उपयोग करे कोई पागल उसको लोग कहें, नमक-मिर्च का लगा हो …

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महंगाई – थान सिंह तराना

एक कहानी खत्म हुई न दूजी चालू कर डाली, सुनने वाले श्रोताओं को आफ़त पैदा कर डाली। किस पर ध्यान लगायें और किसे फिर सुन पायें, बिना नीर की मछली के जैसी हालात कर डाली। रोटी-कपड़ा और मकान की चर्चा गलियों में थी, कहने वालों ने ये पंक्ति आज कहाबत कर डाली। दीन-दीन न दीन …

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पंच तत्व – थान सिंह तराना

आये हैं हम इस जग में कुछ तो नाम कमायेंगे, मुठ्ठी बाँधे आये थे और हाथ पसारे जायेंगे। कोई कहे दीवानापन तो कोई कहे आवारापन, कोई कहे यहाँ पागलपन तो हम पागल हो जायेंगे। समय किसी का सगा नहीं है ये तो चलता जायेगा, दुनियादारी यहीं रहेगी और गुजर हम जायेंगे। सुरमा लगा हुआ आँखों …

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अधूरी जिंदगी – थान सिंह तराना

अधूरी जिंदगी यारो अधूरा फलसफ़ा निकला, जिसकी नई कहानी थी पुराना वो मकां निकला। तमाम उम्र में कोई तो मेरा हो नहीं पाया, जिसे अपना बनाया था पराया वो यहाँ निकला। कोई जज्बातों में मेरे अक्सर आ ही जाता है, मेरे आखिर ख्यालों में समन्दर पीर का निकला। कभी कोई तमन्ना थी मुझे भी आशियाने …

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भटकती हुई आत्मा – थान सिंह तराना

एक भटकती हुई आत्मा सा हूँ मैं, रात-दिन कुछ न कुछ गुनगुनाता हूँ मैं। एक नदी के बहाव में बहता रहा, जैसे पानी का कोई बुलबुला सा हूँ मैं। जिंदगी की डगर में न रहबर मिला, तन्हा-तन्हा चला बेबजह सा हूँ मैं। वक़्त की मार से मैं भी वाक़िफ़ हुआ, इस जमाने में यारो ख़ामोखाँ …

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तेरे ख़्वाब – थान सिंह तराना

तेरे ख्वाबों को पलकों में सजाना मुझको आता है, दिल मे चाहत है कितनी बताना मुझको आता है। सुना है दिल दरिया है चश्मा पलकें होती हैं, हसीं मंज़र नजरों में बसना मुझको आता है। करूं कुर्बान हर लम्हा मिटा दूँ अपनी तन्हाई, जो भी शिकवे हुए तुमसे भुलाना मुझको आता है। सितम चाहे करो …

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मैं ही हूँ – थान सिंह तराना

बुरा नही कोई जग मे,यहाँ बुरा बस मैं ही हूँ, दुनिया के अवगुणों की गठरी सर पै उठाये मैं ही हूँ। नदियाँ, सूखी झरने सूखे कुआ, बाबड़ी और तलाब, घाट-घाट का पानी पीने वाला जग मैं ही हूँ। हवन कभी भी किया नही पर धुंआ खूब उड़ाया है, बस्तियों में आग लगाने वाला आख़िर मैं …

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मुफ़लिसी – थान सिंह तराना

बहश नई पर मुद्दा वही है, काजी ही बदला पर कचहरी वही है। चल पड़ा हूँ हैरतअंगेज सफ़र पै मैं, रास्तों का पता नही पर मंजिल वही है। किसी पर ऐतवार करने से क्या फ़ायदा, रंज बदला गए पर राज वही है। उसको भीड़ मे देखा तो अकेला नही था, मंज़र ही तो बदला था …

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साया – थान सिंह तराना

समय का चक्र दिन-रात यूं ही चलता है, हर रोज उगता है सूरज हर रोज ढलता है। किसी-किसी का मुक़द्दर बुलंद होता है, नसीब तेज बहुत तेज-तेज चलता है। क्यों लोग कोयले को काला ही काला कहते हैं, ये तो कई रूप लेता है जब भी जलता है। मेरे निशेमन मे कोई ख्वाब नही पलता, …

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दिल की बातें – थान सिंह तराना

दिल की बातें खत में लिख दी बाकी रही जुबानी, मेरे लिए तू तेरे लिए मैं यही है प्रेम कहानी। ओ मेरे साथिया मैंने दिल तुझे दिया।। उड़ता बादल बहता पानी कहे ये रुत मस्तानी, मैं तेरे दिल का राजा बन गया तू मेरे दिल की रानी। ओ मेरे साथिया मैंने दिल तुझे दिया।। पतझड़ …

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स्वाभिमान – थान सिंह तराना

दुनिया की मुझको फिक्र नही, ये हँसती है तो हँसने दो। मेरा मकसद है कर्म यहाँ, जो कहती है वो कहने दो। जब स्वाभिमान से मैं खुश हूँ, फिर और किसी का कहना क्या? जीवन सागर और,कस्ती मैं, ये मन उसका मल्लाह है। चाहे तो चले तूफानों में, या रहे ये तट पर बैठा। जब …

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