अब कहाँ अतिथियों का आदर होता हैं -नीतीश निराला

अब कहाँ अतिथियों का आदर होता हैं -नीतीश निराला

अब कहाँ अतिथियों का
सत्कार होता हैं ,
जिस जगह से मानव के
जीवन में चमत्कार होता था ,
वहाँ पे अब बलत्कार होता हैं !!

डरते नही हैं मानव ,
बन रहे हैं दानव ,
हरकत करता ऐसा
जैसा हो कोई जंगली जानव ,
इसके अंदर , बेशर्मी की न सीमित
आकार होता हैं !
जिस जगह से मानव के
जीवन में चमत्कार होता था ,
वहाँ पे अब बलत्कार होता हैं !!

धर्म कहता हैं ,
अकेले की रक्षा करो ,
और मुशीबतों की सहायता ,
कोई तेरा भी साथ देगा ,
ऊपर से देख रहा विधाता ,
बुरे कर्मों में ताजग़ी ,
और अच्छे कामों में बुखार होता हैं !
जिस जगह से मानव के
जीवन में चमत्कार होता था ,
वहाँ पे अब बलत्कार होता हैं

 

 

नीतीश निराला

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