Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

इंसानियत मर चुकी है। और हैवानियत जाग चुकी है।

Pinky Kumari 30 Jul 2023 आलेख समाजिक इंसानियत मर चुकी है। और हैवानियत जाग चुकी है। 14729 0 Hindi :: हिंदी

इंसानियत जैसी मरसी गयी है। हम दिखने में तो इंसान है पर अन्दर से एक शेतान सा बेठा है। जो हर समय कुछ ना कुछ खत्म कर देना चाहता है। हम इंसानों ने अपने से आगे और अपनी भलाई से आगे कभी सोचा ही नहीं है। हम तब तक कुछ नहीं करते जब तक हमारे खुद के ऊपर कोई बात नहीं आजाती है। बाकी समय हम तमाशा देखते है। और अफसोस करते है। करे तो भी क्या करे आज के समय कि लड़ाई सिर्फ फौन तक ही सिमित हो चुकी है। जो लड़ता भी है तो अच्छी सिर्फ फैम और पैसा पाने के लिए और वो लड़ाई सिमित हो कर रह जाती है। जितना पैसा दोगे या किसी वस्तु का लालच भी हो सकता है। उतना ही हम आपके हक में लड़ेंगे और फिर कुछ लोग आजाते है। बिके हुए लोग जो उनका लड़ना उनका साथ देना उनका हमारे पक्ष मे बोलना सब समय और पैसो के साथ सब सिमित होता है। आज के समय में बिना कमाये कोई दस रुपय ना दे तो यह तो हमारी हक कि लड़ाई इसमें क्यों साथ देगे ऐसा लगता है कि हर जगह शेतान बेटा है। डर लगता है। कि ना जाने किसमें और कब जग जाए कोई पता नहीं हर कदम फुक - फुक कर रखना पड़ता है। क्योंकि हर जगह बिके हुई लोग मोजुद है। यह हमारी लड़ाई थी जिसे कुछ सताधारीयो ने बाट दि वो भी धर्म और जाति के नाम पर और हम आसानी से बट भी गये है। हम खुद से लड़ने लगे है। हम एक दुसरे को मारते चले गये और सताधारी लोग तमाशा देख कर हम पर हस रहे है। क्योंकि कमजोरी हमारी है। कि हम उनकी चालों को समझ नहीं पाते है। और आसानी से उन्हें भगवान बना बैठे है। काली पटी बाध रखी हमारे आँखो पर और मुंह पर हम बोलना तो चाहते है पर क्या करे हर जगह गुन्डा गरदी जिंदा हो चुकी है। देश में हमले होते है। और सरकार सब कुछ जानकर भी अनजान है। क्यों कि उनका काम है। घावो पर पटी बान्धना कहाँ जाये कैसे जिये कुछ नहीं पता कब किसका शिकार बन जाये कुछ नहीं पता कब किस कि खबर बन जाए कुछ नहीं पता ह हैवानियत जिन्दा हो चुकी है। कुछ भी ठिक नहीं हो रहा है सब कुछ गलत आज फिर से द्रोपती अपने कृष्ण को पुकार रही है। कि देख तेरी दुनिया फिर से मुझे खाने दोड़ चली है। क्या करू कहाँ जाऊ कुछ नहीं पता है कृष्ण मुझे भी साड़ी का एक छोर देते जा देख तेरी द्रोपती फिर से पुकार रही है। कि इंसानियत मर चुकी है। और हैवानियत जाग चुकी है।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

छेड़ते हुए लड़के ने लड़की से कहा- तुम कितनी सुन्दर हो तुम्हारी आँखे तो ऐसी हैं जैसे समुन्दर हो तम्हारे होठ लाल ऐसे हैं जैसे चुकन्दर ह� read more >>
हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता क� read more >>
किसी भी व्यक्ति को जिंदगी में खुशहाल रहना है तो अपनी नजरिया , विचार व्यव्हार को बदलना जरुरी है ! जैसे -धर्य , नजरिया ,सहनशीलता ,ईमानदारी read more >>
Join Us: