Pinky Kumari 30 Jul 2023 आलेख समाजिक इंसानियत मर चुकी है। और हैवानियत जाग चुकी है। 14729 0 Hindi :: हिंदी
इंसानियत जैसी मरसी गयी है। हम दिखने में तो इंसान है पर अन्दर से एक शेतान सा बेठा है। जो हर समय कुछ ना कुछ खत्म कर देना चाहता है। हम इंसानों ने अपने से आगे और अपनी भलाई से आगे कभी सोचा ही नहीं है। हम तब तक कुछ नहीं करते जब तक हमारे खुद के ऊपर कोई बात नहीं आजाती है। बाकी समय हम तमाशा देखते है। और अफसोस करते है। करे तो भी क्या करे आज के समय कि लड़ाई सिर्फ फौन तक ही सिमित हो चुकी है। जो लड़ता भी है तो अच्छी सिर्फ फैम और पैसा पाने के लिए और वो लड़ाई सिमित हो कर रह जाती है। जितना पैसा दोगे या किसी वस्तु का लालच भी हो सकता है। उतना ही हम आपके हक में लड़ेंगे और फिर कुछ लोग आजाते है। बिके हुए लोग जो उनका लड़ना उनका साथ देना उनका हमारे पक्ष मे बोलना सब समय और पैसो के साथ सब सिमित होता है। आज के समय में बिना कमाये कोई दस रुपय ना दे तो यह तो हमारी हक कि लड़ाई इसमें क्यों साथ देगे ऐसा लगता है कि हर जगह शेतान बेटा है। डर लगता है। कि ना जाने किसमें और कब जग जाए कोई पता नहीं हर कदम फुक - फुक कर रखना पड़ता है। क्योंकि हर जगह बिके हुई लोग मोजुद है। यह हमारी लड़ाई थी जिसे कुछ सताधारीयो ने बाट दि वो भी धर्म और जाति के नाम पर और हम आसानी से बट भी गये है। हम खुद से लड़ने लगे है। हम एक दुसरे को मारते चले गये और सताधारी लोग तमाशा देख कर हम पर हस रहे है। क्योंकि कमजोरी हमारी है। कि हम उनकी चालों को समझ नहीं पाते है। और आसानी से उन्हें भगवान बना बैठे है। काली पटी बाध रखी हमारे आँखो पर और मुंह पर हम बोलना तो चाहते है पर क्या करे हर जगह गुन्डा गरदी जिंदा हो चुकी है। देश में हमले होते है। और सरकार सब कुछ जानकर भी अनजान है। क्यों कि उनका काम है। घावो पर पटी बान्धना कहाँ जाये कैसे जिये कुछ नहीं पता कब किसका शिकार बन जाये कुछ नहीं पता कब किस कि खबर बन जाए कुछ नहीं पता ह हैवानियत जिन्दा हो चुकी है। कुछ भी ठिक नहीं हो रहा है सब कुछ गलत आज फिर से द्रोपती अपने कृष्ण को पुकार रही है। कि देख तेरी दुनिया फिर से मुझे खाने दोड़ चली है। क्या करू कहाँ जाऊ कुछ नहीं पता है कृष्ण मुझे भी साड़ी का एक छोर देते जा देख तेरी द्रोपती फिर से पुकार रही है। कि इंसानियत मर चुकी है। और हैवानियत जाग चुकी है।
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