Pinky Kumari 02 Jan 2025 आलेख समाजिक जीवन 10996 2 5 Hindi :: हिंदी
कभी - कभी लगता करता है। कि सब कुछ खत्म सा हो गया है। और कभी लगता है। कि है कोई आस है जिस पर हम सब जी रहें है। डर लगता है। अपनो को खोने का डर लगता है। अगर अपने नहीं होंगे तो क्या होगा मेरा।भगवान हिम्मत देना ऐसा दिन देखने के लिए क्या माया है। भगवान कि पास जाने पर दुःख और सुख दोनों मिलते है। दोनों सहन करने कि छमता नहीं होती तो दूर जाने कि सोचते है। तो ऐसा लगता है। कि कुछ मिस कर रहें है। ऐसा क्यों है। मुझे पता नहीं इस धरती पर जिने के लिए हर कोई अपनी किम चुका रहा है। अब चाहें तो निर्जीव हो या सजीव हर वस्तु हर जीव इस धरती पर रहने कि किमत चुका रहा है। भगवान भी सोचते होंगे कि मेंने जीवन जिने के लिए धरती पर हर आवश्क सुविधा दि है। जिने के लिए हवा दि , अग्नी प्रदान की , पिने के लिए जल दिया , धरनी सुन्दर लगे इस लिए मैंने हरियाली दी मतलब कि प्रकृति देवी दिन में जिन्दा रह सकों इसके लिए मेने रोशनी के रूप में सुर्ज दिया ,, अब पूरे दिन भर तुम जिन्दा रहें हो तो जिने के लिए मेहनत कि होगी थके होंगे तो इस के लिए मैंने अन्धेरा दिया ताकी तुम लोग अराम कर सकों धरती पर सब कुछ सिमित मात्रा हो इसके लिए मैंने मरना और जीना दोनो बना दिया अब इसके बीच में होने वाले कार्य जैसे कि शादी करना , तीन चार बच्चें पैदा करना , उनको पालना और उनका खर्च उठाना , तीन चार ऐसे रिश्ते बना लेना जिसका कोई मतलब नहीं होता फिर भी तुम इंसान निभाये जा रहे हो मेरे नाम पर ऐसे - ऐसे निम बना लिए हो कि नहीं करोंगे तो भगवान पाप देंगे मेरे नाम पर धर्म को धन्धा मतलब व्यापार बना लिए हों में भी सोचु कि क्या मेंने ऐसा कोई नियम बनाया भी है। हम इंसान भगवान का भी जिना मुश्कील कर दिए है। भगवान को भी भगवान कि जरूरत है क्या करें भगवान जब भगवान ने कहां है कि इंसान अपने दुःख का कारण वो खुद होता है। तो क्यों भगवान को दोष देते हों भगवान तो दुःख सुख के लिए दो ही नियम बताएं है। पहला जो दुःख है। मरना दूसरा जो सुख है। जन्म लेना इसके बीच में होने वाले कार्य में जिम्मेदार नहीं हूँ फिर भी भगवान सबकी पुर सुनते है। परमेश्व हमारे पिता है। और हम सब उनकी सन्तान है। एक पिता होने के नाते उन्होंने हमें इस धरती पर जिने के लिए सारी सुख सुविधा दी है अब देखने कि बात यह है। की हम दुःखी क्यों है हम क्यों चिला रहें है। कि बचा लो भगवन गलती हमारी है। कहीं ना कहीं हमने जीवन जीने में लगती करदी है। भगवान के पास चिलाने कि बजाए रोने कि बजाए उस गलती को सुधारे क्योंकि जहाँ गलती करते हैं वहीं समाधान का भी रस्ता छिपा होता है। भगवान कि बनाई दुनिया को हम भगवान को ही घर बना कर दे रहें है। भगवान के द्वारा बनाई प्रकृति को भगवान को फुल चढ़ा कर दे रहे वो फुल जो डाली पर लगा हुआ है। वो पहले से ही भगवान का है। उसें तोड़ कर हम उसका जीवन नष्ट कर रहें है। उसको तो एक दिन उसी डाल से नष्ट हो जाना है। हम उसे तोड़ कर उस पेड़ को काट कर हम उसका जीवन तो खत्म कर रहें साथ ही हम अपना जीवन भी खत्म कर रहें है। फिर हम कहते है कि भगवान हमें बचा लो ध्यान नहीं दिया भगवान कि बात पर जैसा कर्म वैसा फल जैसा बोओंगे वैसा काटोगे कर्म का हिसाब पका है। जब होता है। तो सब के साथ बरा बर का हिस्साब होता है। इसमें कोई गरीब नही और कोई अमीर नहीं देखा जाता है। और तुमने जो मेरे नाम पर होने जितने भी आडम्बर ,पाखण्ड ,परम्पराए जितनी भी कुप्रभाए है। इन सब का हिस्साब बरा बर होगा क्योंकि भगवान ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाएं जिन्होंने हम इंसानों को रहने के लिए धरती दी घर परिवार दिया उस भगवान को मंदिर बना कर देने वाले हम इंसान कौन होते है। जिस भगवान कि पूरी धरती घर है। उस भगवान को मंदिर बने या नहीं बने इस बात पर कोई फर्क नहीं पड़ता जिस इंसान के अन्दर क्षमा , दया, और तप यह तीन है। तो समझले कि वही इंसान कह लाने योगें है क्षमा का मतलब कि सभी को माफ करते हुए चलें , दया का मतलब कि इस धरती पर हर वो वस्तु हर वो जीव जो दया करने योग्य है उस पर दया करे तप का मतलब कि जीवन में इतनी मेहनत करो कि किसी के आगे हाथ ना फैलाना ना पड़े किसी कि खाने कि उमिद ना रखे बल्की जीवन में इतनी मेहनत करो कि तुम्हारे हिस्से का कितना भी खाले तुम्हारे पास खत्म ना हो तुम्हें मना नहीं करना पड़े ऐसा बनों , जैसे कि हमारे रतन टाटा जी , एपीजे अब्दुल कलाम, आदी इन जैसी मेहनत करों तप करों लोंग मेरने के बाद भी याद करे अपने लिए तो सभी जिते है। जो दूसरों के लिए जीए वही मनुष्य कहलाने योग्य है। पहले अपना भला करें फिर दूसरों का भला करने कि सोचें उम्मीद है कि यह लेख आपको पसंद आया होगा कोई त्रुटी हो तो क्षमा करना 🙏🙏🙏✍️✍️ धन्यवाद
1 year ago
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