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महाकाल

Pinky Kumari 03 Aug 2023 आलेख धार्मिक 9482 0 Hindi :: हिंदी

कृया करके यह लेख पुरा पढ़े और यह किसी धर्म विशेश से सम्बधित नहीं है। यह बात सभी धर्मों पर लगू होती है। तो जरूर पढ़े



सावन का महीना चल रहा है। तो आज हम कालो के भी महाकाल के बारे में बात करेंगे उसे पहले हम उनके स्थान के बारे में बात करते है। उनके स्थान के बारे में हम और आप भली भाति जानते है। कि वह कहाँ वास करते है। 
(1) शमशान उनका प्रिय स्थान आप जानते है कि  उनका प्रिय स्थान शमशान ही क्यों है। जब मेने पहली बार शमशान देखा तो मुझे डर नहीं लगा बल्कि मुझे शांति मिली एक अपना पन लगा ऐसा लगा कि मुझ पर जो बोझ था। वह अब नहीं रहा यह बात अनुभव करने कि है आप ना जाने हम क्यों डरते शमशान का नाम सुन कर जो हमारे जीवन का कटु सत्य है। उसे हम और आप ना जाने उसे क्यों झुठलाते जा रहे है। आप मुझे पागल कहेंगे कि में ऐसी बात क्यों कर रही हुँ पर सच में एक शांति मिलती है। जो इस दुनिया में करोड़ो रूपय देकर भी नहीं मिलती है। एक बात सत्य है। भगवान हमेशा आपको एकांत में ही मिलेंगे जहां विरान जंगल और शांति होगी भगवान वही मिलेंगे जिस भगवान पाने के लिए हम मंदिर जाते है। वह भगवान नहाँ नहीं होते वहाँ पर तो उनकी मुरत होती है। पर उनका मन तो इन्हीं जगहो पर वास करता है। जैसे हम इंसानो को ज्यादा शोर शराबा और ज्यादा आवाजे पसंद नहीं होती ना हम देखते है कि हमें ऐसी जगह मिल जाए जहाँ कोई ना हो ना कोई आता हो ना कोई जाता हो ठिक उसी प्रकार भगवान भी एकांतवासी होते है। उन्हें भी शोर शराबा, भक्ति के नाम पर दिखावा , चिखना चिलाना, जोर जोर से घण्टो कि आवाजे उन्हें यह सब बिल्कु भी पसंद नहीं है। अगर हमारे सामने कोई घण्टा लाकर जौर - जौर बजाने लगे तो हम क्या करेगे हम वहा से उठकर किसी शांत जगह देख कर वहां चले जाएंगे टिक उसी प्रकार भगवान भी उस स्थान को छोड़ कर चले जाते है। या में कहाँ कि मंदिर को छोड़कर वह किसी ऐसे स्थान पर चले जाते है। जहाँ हम इंसान पहोच ना सके और भगवान को पता है। कि वह स्थान एक ही है। वह शमशान जहाँ हम इंसान जितेजी हम वहाँ नहीं पहोच सकते सावन का महीना चल रहाँ है। और मंदिरो में काफी भिड़ होती है। तो भगवान उस स्थान को छोड़ कर अपनी भुमी शमशान आजाते है। अब आप कहोगें कि आपको क्या भगवान बता कर जाते है। में कहुँगी जी नहीं पर में कहुँगी कि एक बार जितेजी शमशान जाकर जरूर देखे और अनुभव करे सारे देवी देवता आपको वही मिलेगे क्योंकि वह वहाँ रह कर सभी मेरे हुए जीवो को मुक्ति प्रदान करते है या में कहुँ कि वह अपना का सुचारू रूप से करते है। और याद रखे हिसाब किताब हमेशा एकांत में ही किया जाता है। इसी प्रकार हमारे जीवो द्वारा किये जाने वाले अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब वही होता है। और सावन के महीने में सपने में या हकीत में कोई शमशान देखले तो समझों भगवान भोले नाथ आपर बहोत  प्रसन्न और वो आपके साथ है। इससे अच्छे भगवान भोलेनाथ के दर्शन नहीं हो सकते



(3) बाबा भोले नाथ=) अब हम आज के लोगो के द्वारा कैसे दिखावे कि भक्ति कि जारही है। उस पर बात करेंगे किस प्रकार लोगों ने भगवान भोले नाथ को मजाक बना कर रख दिया है उन पर कैसे - कैसे  अभद्रता तरीके से गाने बना दिये जाते है। और उन्हें कैसे हाथ में चिलम पिलाते हुऐ दिखा दिया जाता है।,, सिगरेट पिते हुऐ दिखा दिया जाता है। यह कैसी भक्ती है। जैसी हमारी हरकते है। हमने वही भगवान को दिखा दिया है। हम जैसा नशा करते है। भगवान को भी हमनें पैसा ही दिखा दिया है। अपने आपको भगवान से मत तोलो याद रखे हम भगवान नहीं है। और बन्ने कि कोशिश भी ना करे जैसे हमारे विचार है। वैसे ही हम भगवान को देखने लगे है कोई हुका पिला रहाँ है। कोई सिगरेट पिला रहा है। यह सब भक्ति के नाम पर क्या हो रहाँ है। कोई देखा देखी करके अभिशेक करवा रहा है। में यह नहीं कह रही हुँ कि अभीशेक ना करे एक बात सोचे किसी गरीब को दस रुपय देते समय हम पिछे हट जाते है। हमसे किसी गरीब का भला होता नहीं है और हम अभीशेक में तीस,, चालीस लीटर दूध को युही बह जाने देते है। हमसे एक थेली किसी गरीब को देने जोर आता है। और वहीं दूध हम युही बह जाने देते है। आप उसी दुध का शिव का अभिशेक करके उसी दुध कि खिर बना कर लोगों में बाटे या किन्ही गरीब लोगों में बाटे फिर देखो कितना धर्म होता है। कितनी दुवा मिलती है। कितनो के पेट भरते है समझने कि बात है।



(4) माता पार्वती =) अब हम माता पार्वती के बारे में बात करते है। उनको जिस रूप में आज कल के लोग दिखा रहें है। वह गलत है। वो माता है। वो जगत जननी और हम माता को कैसे रूप में दिखा रहें है। उनका सम्मान करना चाहिए उन्हें कम वस्त्रो में दिखा कर उनका अपमान ना करें जो समस्त पृथ्वी लोक को पालक  है। उन्हें हम कैसा दिखा रहें है। और आज कि युवा पिढ़ी जिस रूप में माता पार्वती और शिव को दिखा रही कि माता पार्वती शिव के बाहो में लिपटी हुई है। क्या है। यह सब कुछ तो मरियादा रखो आप जैसे खुद है। और आपके के जैसे विचार है। कम से कम भगवान पर मत थोपो खुद को भगवान में देखना बन्द करो और भगवान को स्वयम अपने अन्दर देखो तब पता चलेगा कि सच क्या है। अगर हमारे सगे माता पिता यु बाहो में बाहे डालकर रोड़ पर चले तो हमें अच्छा लगेगा क्या नहीं ना तो वो तो जगत के माता - पिता है। उन्हें आप अपना रूप देकर क्या साबित करना चाहते हो अगर प्यार आरहा है। तो पत्नी से जाहीर करो भगवान को क्यो बिचमे ला रहे हो कुछ तो लिहाज करो और याद रखे खुद भगवान बन्ने कि कोशिश ना करे


धन्यवाद

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