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मेरे पिता

शरद भूषण मोंगरा 27 Apr 2026 आलेख अन्य लेख, आलेख, मेरे, पिता, श्रेष्ठ व्यक्तित्व। 1195 0 Hindi :: हिंदी

-: "मेरे पिता" :-

पिता एक व्यापक और विस्तारित शब्द है उनके जैसा कोई और नहीं हो सकता। पिता विशाल सागर होते हैं। बहुत सारी मुश्किलें झेलने के बाद भी पिता डटे रहते हैं और बिना थके खड़े रहते हैं ताउम्र हमारे लिए। पिता हमारे जीवन का विराट स्तंभ होते हैं। पिता को समझना काफी कठिन है। पिता तो ईश्वर के जैसा है, जो हमारे साथ कृपा और सर पर साया बना कर रखता है, जिसके साथ होने पर हमें भय,चिंता,डर नहीं रहती। पिता के साए में हमारी सारी आवश्यकताएं स्वयं ही पूरी होती रहती हैं। पिता हमेशा बरगद के पेड़ की तरह होते हैं जिसकी छाया तले हम सदैव महफूज रहते थे। पिता शब्द अति श्रेष्ठ और बलशाली कृपालु है।

शरद भूषण मोगरा के पिता एक महान व्यक्तित्व के धनी हैं वह गरीब, जरूरतमंद व व्यथित लोगों के हक़ लिए लिखते हैं जो समाज की कुरीतियों पर अपनी लेखनी का प्रयोग करते रहे हैं। वह एक राष्ट्रवादी लेखक, विचारक,चिंतक हैं, जो किसी नाम के लिए नहीं है बल्कि सामाजिक उत्थान के लिए लिखते हैं। जहां जिस वजह से भी उन्हें सामाजिक पीड़ा होती है या बुराइयां नजर आती है वह उस पर लेखन के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत करते रहे हैं। इनके पिता श्री गोर्धन दास  सरल जीवन को अपने लेखन में दर्शाते रहे हैं। शरद की माता श्रीमती सोमवती जी भी सरल और कोमल हृदय की हैं जो घरेलू कार्य व आध्यात्म में जीवन यापन करती हैं और घर का काम करती हुई ईश्वरीय भजन गुनगुनाया करती हैं।
घर का माहौल आध्यात्मिक है। आध्यात्मिक विचार इनके परिवार में पहले से ही चले आ रहे हैं इसकी वजह मानवीयता दूसरों की पीड़ा को समझना और ईश्वरीय ज्ञान की ओर चलना इनके परिवार में सम्मिलित है, शरद भूषण मोंगरा को लेखन विरासत में अपने पिता से मिला है गीतकार शरद भूषण मोंगरा कहते हैं कि हमारे पिता एक बड़े बरगद की तरह है, जिसकी छाया में हम स्वयं को सुखद और गौरवान्वित महसूस करते हैं, वे कहते हैं कि हम धन्य हैं कि हमारे पिता का सरल व्यक्तित्व स्तर ऊंचा, और फक्र महसूस करने वाला है। शरद भूषण मोंगरा अपने पिता के विषय में कहते हैं हमारे पिता सीधे-साधे सरल जीवन जीने वाले, किंतु विचारों के धनी हैं। बतौर उनके पिता "सादा जीवन उच्च विचार" का फ़लसफ़ा अपनाते हैं। गीतकार शरद कहते हैं। हमारे पिता अधिक पढ़ने और सरकारी नौकरी प्राप्त करने के बावजूद भी सरल व सीधा सादा जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते हैं। ना किसी प्रकार का घमंड ना शान ना किसी प्रकार का दिखावा। वे कहते हैं कि हमें सभी से प्रेम रखना चाहिए। ऐसे हैं हमारे पिता सरल स्वभाव व्यक्तित्व के धनी श्री गोवर्धन दास जी जिन्होंने संपूर्ण जीवन हमें सत्यता ईमानदारी और परमात्मा के रास्ते चलने का पाठ पढ़ाया। 
उनके लिए शरद भूषण मोगरा की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं -

कितने अच्छे हैं पापा 
जब दफ्तर हो जाते हैं तो 
हम सब करते हैं टाटा 
कितने अच्छे हैंपापा
गुब्बारे पिचकारी जब वह देते हैं हमको लेकर 
खुद भी कितने खुश होते हैं हमें मिठाई देदेकर 
खेल खेल में रहते हैं वह मुझे खेलने नहीं आता 
कितने अच्छे हैं पापा। 

इस  से अधिक पिता के सम्मान में मेरे पास शब्द नहीं हैं। 
मैं पिता के श्री चरणों में नतमस्तक हूं।

कवि गीतकार लेखक 
शरद भूषण मोंगरा।

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