Pinky Kumari 03 Aug 2023 आलेख राजनितिक 7245 0 Hindi :: हिंदी
आज में फिर से सरकार , मिडिया, और देश में होने वाले दंगे फसाद पर बात करने वाली हुँ में पहले भी कह चुकी हुँ यह दंगे अपने आप और अचानक नहीं होते सरकार खुद दंगे करवाती अब चाहें वह दंगे धर्म को लेकर हो या जाति को लेकर या किसी विशेष क्षेत्र को लेकर ही क्यों ना हो सरकार के बिना इस देश में पता भी नहीं हिलता तो जाहीर सी बात है। कि यह दंगे भी सरकार ही करवाती है। अपने फायदे के लिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता चाहें कोई मरे या जिये आज देश धर्म के दो तराजुओं में बेठा है। जिस का पलड़ा भारी वही धर्म सबसे आगे और इसी तराजू को ऊपर रखने के लिए हिन्दु मुस्लिम आपस में लड़ रहे है। और कुछ सताधारियों द्वारा लड़वाया जा रहाँ है। आज धर्म एक मजाक बन कर रह गया है। और मजाक भी हम ही बना रहें है। और जिस प्रकार मिडिया का रोल है। मिडिया भी इसमें पिछे नहीं है। मिडिया भी एक तरफा न्युज दिखा कर के लोगों को उकसा रही है। देश कि शांति मिडिया के हाथों में होती है। कि हम ऐसी न्युज दिखायें कि देश में शांति बनी रहें में यह नहीं कह रही हुँ कि ऐसी न्युज दिखाये नहीं जरूर दिखाये पर हिन्दु मुसलमान करके नहीं निष्पक्ष हो कर न्युज दिखायें मिडिया वालों ने न्युज को धर्म और जाति के नाम पर बाट दिया है। हरियाणा में होने वाले दंगे के पिछे किसी एक धर्म कि गलती नहीं है। याद रखें कि ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है। जरूर कुछ लोगों ने पहले से ही या में कहुँ कि सरकार के चुने हुये कुछ लोग मुसलमानो कि रेली में घुस कर पथर बाजी कि हो क्या हमे पता होगा कि उन दंगाईयों में से कितने मुस्लमान थे और कितने हिन्दु नहीं बता सकते उन्हें तो किसी एक धर्म को बदनाम करने के लिए यह लड़ाई शुरू कि याद रखे में बार - बार कहती हुं कि हिंसा करने वाले लोगों को सरकार द्वारा ही पाले जाते हैं उन्हें कहाँ जाता है। कि तुम आधे लोग हिन्दु रेली चले जाना और आधे लोग मुस्लिम लोगों मे शामिल हो जाना और जो पहले पत्थर बाजी करेगा वहीं से ही दोनों धर्म के लोग लड़ पड़ेगें यही दंगाईयों का काम होता है। हिंसा फैलाना यह तो लड़ाई कि शुरुआत करते है। और हम असल में एक दुसरे से लड़ पड़ते है। अगर सच में हमें एक दुसरे से नफरत होती तो हम कब काही एक दूसरे को खत्म कर डालते होते यह नफर, यह, लड़ाई, यह मार काट, असल में जनता का मसला नहीं है। हिन्दु मुस्लिम हम जनता नहीं करते असल में कुछ सताधारी लोग अपने फायदें के लिए कुछ युवाओं को पैसे देकर धर्म और जाति कि भड़काऊ सिख देकर यह दंगे करवाती है। और हम जनता धर्म के नाम पर एक दुसरे से लड़ पड़ती है। समझो इस बात को कृप्या लड़े नहीं मणिपुर में भी ऐसा ही हुआ था दो सम्पदाय कि लड़ाई के कारण लोगों को घर से बे घर होना पड़ा दंगाईयो ने और सरकार ने अपना काम कर दिया और वहाँ कि जनता जाति के नाम पर आपस में लड़ पड़ी औइ इसका खामियाजा वहाँ कि गरीब जनता भुगत रहीं है। घर से बेघर होने लगे है। याद रखे अमीरो के पास पैसा होता है। वह लोग ऐसी लड़ाईयो से दुर रहते है। वह लड़ाई नहीं लड़ते वह लड़ाई करवाते है। मरते कौन है गरीब जनता, आम आदमी इन्हीं लोगों को होने वाली हिंसा का खामियाजा उठाना पड़ता है। यह एक ऐसा जाल है जिसमें हम आम जनता फसते चले जारहें है।
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