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अरे इस जमाने का क्या कहना? चेहरों पर चेहरें हैं, सच्चाई अभी भी घोड़ अंधेरे में ही है। अजब तेरी फितरत, गजब तेरी रहनुमा है। बोलना कुछ है, read more >>
तुझ सा नादान कोई सारे जमाने में नहीं, इल्म ना थी तुझे, ना ही कोई अंतर्ज्ञान। तूं समझता रहा बहुत कुछ, पर थी हकिकत कुछ भी नहीं। जब मैं ने ग read more >>
आज व्यक्ति और समाज दु:ख के घनघोर अंधेरों में है । कहीं दु:ष्कर्म है तो कहीं लूटपाट है । कहीं हिंसा है तो कहीं मान _अपमान है । कहीं जात _ प read more >>
मैं गोबर भी छू लेती हूं, गईया भी धो लेती हूं, मैं खेतों में,दिन भर काम करके, धूप भी सह लेती हूं, मैं किसान की बेटी हूं..... इतनी मेहनत करके भ read more >>
चाह है मंज़ील, चाह ग्मन, और चाह ही पथ‌ का संगम है! चाह प्रभा का नुत्तन दृष्य, कर रही डगर हर पावन है!! ‌ ‌‌ ‌‌‌‌‌ चाह है भक्ती, चाह कर� read more >>
हर तरफ है धुँआ, अचानक एक पल में क्या हुआ? सामने आँखों के , हर मंजर बदल गए। आँखों में एक पहरा, जख्म देख जरा गहरा। दिवानों के कत्ल में स� read more >>
गुरु शब्द बड़ा ही सूखकारी, उनके रहते न आती है, किसी भी प्रकार की समस्या भारी। हम सब रहते हैं बेफिक्र, की अपने ऊपर हैं गुरुवर। गुरुवर_गु read more >>
खून में उबाल भरता हूं, जोश को तूफानों में, तब्दील करता हूं। आग की लौ बन जाता हूं, पानी का विस्तार बन जाता हूं। शक्तिशाली हूं, महाशक्ति � read more >>
मस्ती भरी तबीयत अपनी मस्ती में हम डूबे, आसमानों से भी ऊंचे हैं यारों अपनी मनसुबें। शान से हमको जीना है जब तक सीने में दम है। जितनी वफ� read more >>
चाहोगे तो क्या नहीं होगा? बस अपने अन्दर में, जोश का ज्वाला जगाना होगा। और ऐसा करिश्माई, चमत्कार दिखाना होगा। कोई भांपे तो भांप न सके, � read more >>
लगता है निराश हो गया है, कुछ तो वजह होगी? खैर छोड़ो कोई बात नहीं। लगता है कुछ ज्यादा ही, मगरुर हो, नहीं तो, तुम्हें भी पत्ता होता, अब क्या read more >>
बिगड़े बोल पटेल के,तभी खत्म है साख। चकमा देते हैं सभी, ऐसों को कर राख।। बिगड़े बोल पटेल के,कहते बुरा समाज। शिकवा करते लोग हैं,बदतर मय ह read more >>
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