किसान आत्महत्या क्यों करें” – बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’

किसान आत्महत्या क्यों करें” – बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’

किसान समस्त मानवीय जाति के लिए पालनहार हैं, परन्तु अन्नोत्पादक किसान की वास्तविक स्थिति आज अत्यन्त दयनीय हो चुकी है। उसकी उत्पादकता लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है किन्तु लाभ नगण्य है। उसका सदियों का मोह आसानी से नहीं छूट रहा किसानी के कार्य से। किसानी में उसके प्राण रचते-बसते हैं, उसकी मर्यादा है। मान
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देश मे किसान की हालत – अमित रजक

हम कृषि प्रधान देश मे रहते है।जी हाँ मेरी बात को फिर से गौर से पढ़ें के,हम कृषि प्रधान देश मे रहते है। औऱ सरकार और कुछ अत्यंत समझदार लोग के बदौलत ये आलम है,हालात कुछ इस कदर है के हम गेहूं निर्यात कर रोटियां आयात करते हो।अपने सुना है कभी ऐसा?अन्न को इस जहां
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शोध” के अभाव मे, – दिव्यानि पाठक

शोध” के अभाव मे, वस्तु की कीमत नहीं, होती बाजार मे। वैसे” ही जैसे” समाधान” नहीं हो पाता , बंजर भूमि के अंदर पड़ी दरार का —-दिव्यानि पाठक 2+

साहित्य है अनमोल – शोभा(सृष्टि)

साहित्य एक महान वटवृक्ष के समान है जिसकी जड़े बहुत गहरी है साहित्य वह गहरा समुन्दर है जिसमे उतरने वाले गोताखोर खाली हाथ नही लौटते बल्कि शब्दार्थ रूपी मोती बटोरते है जो उनकी जिन्दगी में खुशियों की चमक फैला कर उन्हे मालामाल कर देते है भाव रूपी नदियाँ इसमे समा जाती है साहित्य वह खुला
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निर्भया के समाज से सवाल – पूनम शर्मा

क्या 16 दिसम्बर 2012 की वह रात बाकी रातों से अलग थी? क्या मैंने रात को घर से बाहर निकल कर कोई गलती की थी? जो मुझे ऐसी सज़ा मिली। मेरा सपना था कि मैं अपने माता पिता का नाम रौशन करूं। वह मेरे नाम से पहचाने जाएं। पर इस तरह से उन्हें पहचान मिलें,
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चीजो को याद रखना….शिवानी शुक्ला

जब आप किसी पर जरूरत से ज्यादा विश्वास करो और वो विश्वास टूट जाए तो आप बहुत बुरा और अकेला सा महसूस करते हो… तब आप खुद में पूरी तरह से टूट जाते हैं.. और फिर भगवान को कोसते हो या फिर खुद को…! जबकि ऐसा नहीं होता है… पता है क्यों? जब आप किसी
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माँ – शब्द नहीआत्मा है

माँ शब्द नहीं आत्मा है इस धरती के लिए के लिए परमात्मा है माँ वह पवित्र गंगा जल हैजो घर को मंदिर बना देता है माँ सृष्टिकर्ता की अद्भुत अनुपम कृति हैजो अपनी दिव्यता से इस जहाँ को रोशन करती है माँ वह महाकाव्य हैजिसे लिखनेस्वयं सृष्टिकर्ता की लेखनी भीपर्याप्त रूप से समर्थ नहीं है
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धीमा जहर – ऋतु गुप्ता

तंबाकू एक नशा है जो धीरे-धीरे इसां को अंदर से बिलकुल खोखला कर देता है। इसका सेवन करने वाले इस की लत का शिकार हो जाते हैं। यह शरीर में शनै-शनै फैलने वाला जहर है।फायदे के नाम पर सिर्फ व सिर्फ शौक है,बाकी तो नुकसान ही नुकसान है। न जाने कितनी अनगिनत बिमारियों का कारण
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धुन – हेमा पाण्डेय

आज इतने दिनों के बाद मैं बाहर निकली . चली जा रही थी .अपनी ही धुन में. सोचा चलो आज मंदिर ही घूम आते हैं .वहां मन्दिर के अंदर जाने के बाद मैंने पूजा अर्चना की फिर कुछ देर इधर उधर देखा .पलटने ही वाली थी कि मेरी नजर कतार में बैठे उन भिखमंगों पर
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गुरु बिना ज्ञान नहीं – शशी मगरिया

मेरा नाम शशी मगरिया है। और मेरा एक प्यारा सा गांव है। मेरे गांव में हर प्रकार के लोग रहते हैं। उनको देख कर में कुछ बाते सीखा हूँ। जो आज आप को बताना चाहता हूँ। याद रखना एक पेन गलती कर सकता है लेकिन एक पेंसिल कभी भी गलती नहीं कर सकती कयूकि उसके
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