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अजीब दास्तां -गुलबदन खां की कब्र

भूपेंद्र सिंह 18 Dec 2023 कहानियाँ अन्य उपन्यास - गुलबदन खां की कब्र , अनेक भाग, दो साल का सफरनामा , दो दोस्त विजय बहादुर और मनोज की कहानी 14509 0 Hindi :: हिंदी

उपन्यास
          गुलबदन खां की कब्र
                  भाग - 1
               (अजीब प्रश्न)

चारों और से सुंदर काननो से घिरा हुआ एक बहुत ही सुंदर साम्राज्य था -अवंतिपुर। जहां के राजा राय बहादुर जी बड़े आमोद प्रमोद से अपना जीवन यापन कर रहे थे। अवंति अत्यधिक सुंदर साम्राज्य था। जहां के लोग भी खुशी से अपना जीवनयापन कर रहे थे।परंतु खुशी में गम का आ जाना तो स्भाविक सी बात है।रियासत के महाराजा रायबहादुर जी फिर भी निराशा में डूबे रहते थे क्योंकि उनके कोई संतान नहीं थी।वे अपने उतराधिकारी को लेकर हमेशा चिंता में रहते थे।महाराजा की आयु भी अब 45 वर्ष की हो चुकी थी।एक दिन महाराजा रायबहादुर जी ने दरबार में घोषणा की "कल सुबह रियासत के सभी युवा हमारे दरबार में पहुंच जाए,हम ये फैसला करेंगे की हमारे बाद में इस रियासत का महाराजा कौन बनेगा।" ये घोषणा पूरी रियासत में कर दी गई।अगली सुबह महाराजा के दरबार में युवाओं की भीड़ लग गई। महाराजा रायबहादुर दरबार में उपस्थित हुए।युवाओं की और देखते हुए महाराज ने गभीरता से कहा"रियासत का महाराजा तो हर कोई बनना चाहता है।लेकिन हर कोई तो नही बन सकता ना।मेरे बाद में इस रियासत का महाराजा वही बनेगा जो मेरे प्रश्न का सही जवाब ढूढकर लायेगा।" ये सुनते ही सारे युवा उत्सुकता से महाराजा की और देखने लगे।महाराजा ने फिर कहा"मेरा प्रश्न ये है की शैतान गुलबदन खां की कब्र कहा पर है।" सारे दरवार में अजीब सी खामोशी छा गई।महाराज फिर बोले"है कोई जो इस प्रश्न का उत्तर पता लगा सकता है।" ये सुनते ही लगभग आधे युवाओं ने हाथ खड़ा कर लिया।महाराज अजीब तरीके से मुस्कुराए और फिर बोल पड़े"इस प्रश्न का उत्तर ढूढने के लिए अनेक बहादुर सुरमे गए पर सारे विफल रहे,सब मारे गए,ये एक मौतिया प्रश्न है जो भी जवाब के लिए गया वो मारा गया।"ये सुनते ही लगभग सारे हाथ नीचे हो गए।एक हाथ अब भी ऊंचा था।एक युवा मुस्कुराते हुए महाराज की और देख रहा था।उसकी उम्र लगभग 20 साल की होगी।महाराज ने उसे आगे अपने पास बुलाया।"काफी बहादुर लगते हो,तुम्हे लगता है की तुम इस प्रश्न का जवाब ढूढकर ला सकते हो?"महाराज ने लड़के की और उत्सुकता से देखते हुए कहा।लड़के ने भी गंभीरता से जवाब दिया"जी महाराज,जरूर।" "अभी भी तुम्हारे पास वक्त है, सोच लो,हो सकता है तुम वापिस जिंदा न लोट पाओ।" लड़के ने आत्मविश्वास से जवाब दिया " महाराज इस प्रश्न का जवाब मैं आपके कदमों में लाकर रख दूंगा।""ठीक है तो तुम्हें कितना समय चाहिए?" महाराज ने शकभरी निगाहों से उस लड़के विजय बहादुर की और देखा।विजय कुछ देर के लिए अपनी सोच में गुम सा हो गया और फिर वो अनायास ही बोल पड़ा"दो महीने।" विजय का जवाब सुनकर महाराज अजीब सी हंसी में हंसे और बोले"ये काम उतना आसान भी नहीं है जितना कि तुम सोच रहे हो, मैं तुम्हे प्यार दो वर्ष का समय देता हूं,अगर तुम जिंदा वापिस लौट सके तो।" विजय ने भी हां में सिर हिला दिया।अगली सुबह विजय अपने माता पिता का आशीर्वाद लेकर अपने दोस्त मनोज को अपने साथ लेकर इस विजय अभियान पर निकल पड़ा।हालांकि उन दोनो को ही नही मालूम था की उन्हे कहा जाना है?वे दोनो बस यायावर की तरह चले जा रहे थे।चलते चलते वे एक वीरान और भयानक से जंगल में घुस गए।लंबे समय के बाद में अब मनोज ने अपनी चुप्पी तोडी और वो बोल पड़ा।
मनोज - यार विजय एक सवाल पूछूं क्या?
विजय - हां क्यों नहीं पूछो मनोज।
मनोज - विजय ये गुलबदन खां था कोन?उसे किसने मारा होगा?उसकी कब्र कहा होगी?
विजय - पता नही मनोज।पर हमे उन लोगो का पता लगाना होगा जिन्होंने उसे दफनाया होगा।
मनोज - मुझे तो शेतानो से बड़ा डर लगता है और एक ये जंगल इतना भयानक है और रात भी होने को आ गई है। मैं तो कहता हूं विजय हमे आज की रात इसी जंगल में बितानी चाहिए नही तो जंगली जानवर हमे मार डालेंगे।
विजय - मुझे लगता है हमे कुछ आगे चलकर देखना चाहिए। शायद गुलब्दन खां के बारे में कुछ पता चल जाए।
मनोज - अरे मेरे भाई महाराज ने तुम्हे दो साल का समय दिया है,दो दिन का नही।इस प्रश्न का जवाब आराम से पता लगा लेंगे।
विजय - ठीक है मनोज। पर हमे रात गुजारने के लिए कोई गुफा ढूंढनी चाहिए नही तो जंगली जानवर हमे मार डालेंगे।
ये कहते हुए वे जंगल में आगे बढ़ गए । अंधेरा हो चुका था। चारों तरफ एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था।सिर्फ खामोशी ही चारों तरफ विराजमान थी। अचानक जंगली भेड़ियों के भौंकने के आवाज आने लगी। वे दोनो थोड़ा सा डर गए।हालांकि विजय बहादुर को डर तो नही लगता था पर उस भयानक रात का दृश्य ही कुछ ऐसा था की कोई भी होता तो डर ही जाता।वे दोनो जंगल के बीचों बीच पहुंच गए।उन्हे अचानक एक गुफा नजर आई । वे दोनो उस गुफा में घुस गए।मनोज तो गुफा के अंदर पड़ी घास पर लेट गया था।विजय भी वही बैठ गया। अंधेरा भी पहले से अधिक बढ़ गया था।मनोज बोल पड़ा।
मनोज - विजय क्या भयानक रात है,कोई भूतिया कहानी हो जाए तो मजा आ जाए।
विजय - हां मुझे कोई कहानी सोचने दो।
विजय अपनी सोच में गुम सा हो गया।मनोज उसके चेहरे की और उत्सुकता से देखने लगा।अचानक विजय के चेहरे पर थोड़ी सी चमक आ गई।वो बोल पड़ा "ठीक है मनोज एक भूतिया कहानी सुनाता हूं।हां पर तुम कही डर मत जाना।"
"अरे भाई ऐसी भयानक रात में भूतिया कहानी सुनने के तो मजे ही कुछ और है।" ठीक है तो कहानी का नाम है "कब्रिस्तान का चौकीदार ।" कहानी का नाम सुनते ही मनोज थोड़ा सा डर गया। वो लेट कर मजे से कहानी सुनने लगा । विजय ने भी अपनी कहानी सुनानी शुरू कर दी।।

                   ✍️✍️ भूपेंद्र सिंह 
                                रामगढ़िया

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