Meena ahirwar 17 Feb 2025 कहानियाँ समाजिक कहानी- एक रिश्ते की हक़ीक़त... 22044 0 Hindi :: हिंदी
आज कल रिश्ते तो है बस नाम के, जहाँ प्यार विश्वास होता था, आज कल बस नाम के है, प्यार मोहब्बत तो दूर की बात है, आजकल तो हर रिश्ता पहले मतलब देखता है, और जहाँ मतलब खत्म वहाँ रिश्ता भी खत्म, यही तो चलता आ रहा, आजकल तो बिना मतलब के अपना एक मिनिट भी कोई किसी को क्यों दे, यही देख कर आजकल लोग अपना समय निकाल रहे है, इस मतलब की दुनिया में ऐसा नहीं है की आपका निजी स्वार्थ ना हो, आख़िर थोड़ा तो संगति का भी असर होता ही है, लेकिन स्वार्थ एक ही तरीके का हो जरूरी नहीं, किसी को रिश्तों से सच में लगाव होता है तो कोई सिर्फ़ दिखावे के लिये रिश्तों से लगाव रखते है, इसमें अपना कौन है, ये किसे पता, समय पर पता तो चलता है, तब कोई अपना भी हो सकता है तो कोई आपके खिलाफ़ भी तब ऐसी स्थिति में हम क्या करे, इस सोच में अच्छा खासा इंसान भी पड़ ही जाता है , कोई भी रिश्ता क्यों ना हो, उस रिश्ते की सबसे पहली नीव विश्वास होती है, लेकिन यदि उस रिश्ते में पहली ही नीव खोखली है तो वहाँ कोई रिश्ता कैसे टिक सकता है, जिस प्रकार एक पेड़ को लगाने के लिये खाद और अन्य तत्वों की जरूरत होती है,, वैसे ही एक खूबसूरत रिश्ते के लिये भी प्यार,विश्वास, सम्मान, एहसास, आदि, संवेगों की आवश्यकता होती है, जब इन संवेगों को लोग समझते है, तो एक खूबसूरत रिश्ता बन ही जाता है, फ़िर वो कोई भी रिश्ता क्यों ना हो उसमें आपने पन का एहसास होता ही है, नाम- मीना अहिरवार, जिला- छतरपुर (म.प्र).