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दहेज....।

कुमार किशन कीर्ति 08 Aug 2023 कहानियाँ समाजिक दहेज,मेहमान। 7965 0 Hindi :: हिंदी

विनायक बाबू के घर शादी की तैयारी बड़े ही धूमधाम से हो रही थी।धीरे_धीरे मेहमान आ रहे थे। कई प्रकार के उपहार से कमरा भरा दिखाई दे रहा था,लेकिन इस खुशी के माहौल में कभी_कभी विनायक बाबू की आंखें भर आती थी,और ऐसा हो भी क्यों ना?
एकलौती पुत्री है सरोज,विनायक बाबू ने बड़े ही लाड प्यार से पाला है उसको।पत्नी की मृत्यु हो जाने के बाद फिर दुबारा शादी नहीं की,और सरोज को माता_पिता दोनों का प्यार दिया था।
पेशे से हाई स्कूल के अध्यापक होने के वाबजूद भी उन्होंने सरोज को शिक्षा और संस्कार से संवारा था।

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