प्रवीण कुमार 28 Oct 2025 कविताएँ राजनितिक 4433 0 Hindi :: हिंदी
आप अपने आज़ के लिए जीएं। फिर कह सकते हैं, कोई तो बात है। जो आप में ही खास है। अकेले तो नहीं हो, शायद! इसके साथ आपका विश्वास ही है। ऐसे ज़ीने की कोशिश एक उमंग खाश है। आप अपने आज़ के लिए जीएं। शाम के डूबने वाले सूरज की लालिमा; अपने आप में खास है। रोज़ कोई जिदद् भी नहीं हां! आप के लिए खुद को , अहमियत देने का तरीका खाश है। आप अपने आज़ के लिए जीएं। माना कि परिवार में कोई काम भी जरुरी हो सकता है । जो होता ही रहता है। लेकिन खुद को अहमियत ना दे सका, वो जीवन क्या कहलाता है? मैं तो निष्पक्ष ही कहुंगा - आप अपने आज़ के लिए जीएं।