Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

ईश्वर

शरद भूषण मोंगरा 23 Apr 2026 कविताएँ धार्मिक 1364 0 Hindi :: हिंदी

"रूह" (आत्मा)

धुर धाम के लिए चली, मैं रब के दर की थी कली
भुला चुकी थी आप को, थी काल में रली मिली 
मैं ढूंढती सी शांति को इस धरा पे जो न थी 
वो शांति स्वयं मुझ ही में बैठ कर के मौन‌ थी 

संसार में ऐसी फंसीं रिश्तों के माया जाल में 
मैं फंसतीं ही चली गई दुःखों के इस‌ जंजाल में 
मरती जन्मी ‌बौझ ढोती नित नए शरीरों का
मैं किस तरह से चौला ओढ़ू मालिक के मस्त फ़क़ीरों का
कोई मुझे भी नाम दे मुर्शीद मिले धुर धाम का
युक्ति‌ बता दे नूर की, दिया जले‌ जो‌ नाम का 
सतगुरु वो भेद है, जो हक मुकामे जानता 
माया में है घिरा जहां(संसार), सत्य नहीं पहचानता 
ये प्रेम का मजमून है,रस्ता रुहानी ज्ञान का
आई जहां से जा मिलूं सफ़र करूं सतनाम का।

(यहां रूह पुनः अपने घर अर्थात मालिक के धाम जाने का प्रयास कर रही है।)

शरद भूषण मोंगरा।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: