प्रवीण कुमार 09 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 3949 0 Hindi :: हिंदी
इतफाक से ज़िन्दगी में पहलू बने आप। सच से पहले भी सच के बाद। निशान न मिले मुझे वक्त से आज। इतफाक से ज़िन्दगी में पहलू बने आप। नाराज़ नहीं हूं । लेकिन एक आवाज मैं बना हूं, आज। पूछते तो दोस्त हैं। हां, अकेला जवाब हूं। तुम्हारे पास मैं आज। इतफाक से ज़िन्दगी में पहलू बने आप। तारीफ़ ज़माने से होती है। अब उस ज़माने के दोस्त! मैं नहीं आऊंगा, पास। इतफाक से ज़िन्दगी में पहलू बने आप।