Tikeswari 13 Jul 2023 कविताएँ बाल-साहित्य Motivesion 6998 0 Hindi :: हिंदी
1 .काली घटा का घमंड देखा रंग रूप एक जैसा आसमान को छूने चली है मकड़ी टूटा जाल बिखर गई कोशिश। 2. झुंड बनाकर कर खड़ा इंसान . झांक झांक कर देखता बादल चंचला भी चमकती है मानो ह्रदय थम गई हो . 3. हवा भी सर्र - सर्र करती मानो वह झुमि झुकी डाली हो . कागार पर बैठा बगुला अपनी पीड़ा बटोरता , अंधकर की तरह कष्ट की छाया में डूब गया। 4. कोकिल भी मधुर आवाज से मन को भर पाए तन में था चिंगारी बुझ गया है अब लकड़ी काटने गया लकड़हारा बचा दिया ठुठ दीमक भी चढ़ने लगा मानो पेड़ो का कंकाल बना दिया हो। 5. काले धुएं बादल में ऐसे गुम जाऊ की मैं खुद को पहचान ना पाऊं . ऐसे अंधेरे में भी मुझे सहरा न मिला । ममता के बादल में भी सुख न मिला। 6. कमजोर शरीर पर भी अंधेरे का घेरा था वियोगी दर्द को अंधेरे में छिपा दिया अब मै असहनीय हो गई हूं . अब दुखी से बाहर निकलना चाहती हूं अब स्वयं का पहचान बना पऊ। 7. विपती के बादल की तरह भैभित हूं असमर्थ हूं वियोग से जीवन में भी बिना पलक झपकाए मै भ्रमित हूं ।वास्तविक पीड़ा में भी असवास्त हूं । धारे भी किनारों में टकरा -टकराकर चलती अपनी मंजिल पर. आंधी भी अपनी ताकत वन वन करता परिचित । न ही शक्ति ना ख़ुद को पहचाना चलते गए अपने मंजिल पर ।