Anilkumar Rathwa (Sameer) 23 Sep 2025 कविताएँ समाजिक धीमी सफलता का फल 3108 0 Hindi :: हिंदी
धीमी सफलता का फल मीठा होता है, जैसे धीरे-धीरे पका आम रस घोला होता है। हर कदम पर सबक सिखाती है, हर ठोकर इंसान को मज़बूत बनाती है। संघर्ष की सीढ़ियाँ चढ़ने वाला, कभी घमंड से न भरने वाला। जैसे पेड़ ऊँचा हो जाता है, पर जड़ें ज़मीन में गहरी रह जाती हैं। तेज़ सफलता अक्सर भटकाती है, नदी के बाढ़-से बहा ले जाती है। दिल में घमंड की आग जलाती है, और इंसानियत को धुएँ-सा छुपा जाती है। जो धरती से जुड़ा रहता है सदा, उसका नाम अमरता में गूंजता है। जैसे दीपक आँधी में भी जलता है, वैसे ही सच्चा इंसान दुनिया में चमकता है। धैर्य, मेहनत और सच्चाई का सहारा लो, सफलता के संग विनम्रता को भी प्यारा लो। क्योंकि असली पहचान चरित्र से बनती है, और वही सदा अमर रहती है।